अंकल ख़ड़ा लॅंड मेरी प्यासी चुत

अंकल ख़ड़ा लॅंड मेरी प्यासी चुत – 1 Uncle Ka Khada Lund Meri Pyasi Chut

हेलो दोस्तो, मेरा नाम संजना है ओर मैं सबसे पहले आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहती हूँ क्योंकि आप लोगो की वजह से ही हम जैसे लोगो को अपनी बात कहने का मौका मिलता है ओर अब मैं अपनी घतना को विस्तार से सुनने जा रही हूँ जिसमे मैने मेरी बुआ के पाती के साथ अपनी चुदाई के बहुत मज़े लिए.

दोस्तो उस समय मेरी दीवाली की च्छुतटियाँ चल रही थी ओर मुझे कुछ दिन घूमने, आराम करने के लिए गाँव जाना था, लेकिन मेरे साथ घर वाले नही जा सकते थे क्योंकि मा ओर पापा को अपने ऑफीस जाना था ओर भाई की कोचैंग क्लास अभी तक शुरू थी, लेकिन मेरी बस आ परिवार भी गाँव जाने वाला था. हर साल एक परिवार को वहाँ पर जाकर दीवाली से पहले का सब काम करना रहता है, लेकिन इस साल मेरे सभी चाचा भी बहुत व्यस्त थे. मेरी बुआ ने कहा की वो लोग वहाँ का सब काम कर लेंगे ओर मेरी बुआ को हमारा गाँव उनके ससुराल के गाँव से कुछ ज़्यादा पसंद था क्योनि हमारा गाँव एक टापू के पास मैं है.

तो दोस्तो हुआ यह की मेरे पापा ने मुझसे कहा की मैं भी उन लोगो के साथ गाँव जा सकती हूँ. मेरी बुआ का बेटा निखिल मेरे बराबर ही है ओर मेरी उसके साथ अछी जमती है तो मैं भी अब उनकी यह बात सुनकर राज़ी हो गयी ओर फिर हमने 10 दिन का प्लान बनाया.

उनमे से कुछ दीनो के लिए बुआ के ससुराल जाने का प्लान भी था क्योंकि वहाँ पर उनकी देवरानी गर्भवती थी तो उन्हे गोड भराई की मदद करने के लिए जाना था. दोस्तो मेरी बुआ की उमरा करीब 40-42 साल होगी ओर उनके पाती की उमरा भी करीब 43-44 साल होगी, उनके पाती जहाज़ पर काम करते थे ओर वो दिखने मैं बहुत स्मार्ट भी थे. वो साल के 8 महीने जहाज़ पर बिठाते थे ओर बाकी चार महीने अपने घर पर. फ्रेंच कट वाली अंकली, पूरी तरह से सॉफ चेहरा, 6 फुट हाइट, उनका अच्छा दिखने वाला शरीर था.

दोस्तो मेरी उनके पाती के साथ भी बहुत अछी जमती थी ओर वो हमेशा मेरे साथ एक दोस्त की तरह बात करते थे ओर बहुत मस्ती मज़ाक भी करते थे, लेकिन मेरी बुआ थोड़ी खराब है, लेकिन वो मुझसे बहुत प्यार कराती है ओर बुआ बहुत झगड़ालु भी है. पता नही उनका परिवार उनका रोज कैसे सहता है?

अब हम गाँव मैं पहुच गये ओर हमारे गाँव के घर मैं हमारा जो नौकर है सोनू, उसकी कुछ ही महीनो पहले शादी हुई थी ओर अब हम पहली बार उसकी नयी नवालेी दुल्हन से मिल रहे थे. वो बहुत सुंदर थी ओर वो करीब 22-23 साल कीट ही. वो दोनो अपने क्वॉर्टर मैं रहते थे ओर उनका क्वॉर्टर हमारे घर के पिच्चे की तरफ था. उसके लिए एक दरवाजा घर के अंदर से यानी हमारी किचन से था ओर दूसरा दरवाजा बाहर से था. दोस्तो हमारा घर भले ही बहुत बड़ा था, लेकिन उसकी बनावट पूरेानी स्टाइल मैं थी यानी की दरवाजे पर नये तरह के तले नही थे पूरेानी टाइप की कुण्डी थी ओर दरवाजे भी पूरेाने टाइप के लकड़ी वाले थे. पहले दिन हम बहुत अछी तरह से सेट हुए ओर सोनू की बीवी सुप्रिया बहुत सुंदर थी, भले ही वो ज़्यादा पढ़ी लिखी नही थी ओर वो हमारी भाषा इतनी अछी तरह से नही समझ पाती थी, लेकिन वो बहुत ही कम समय मैं हमारे घर का सब काम अछी तरह से सिख गयी थी ओर वो खाना भी अच्छा ख़ासा बना लेती थी ओर बुआ के पाती उसके साथ भी बहुत मस्ती मज़ाक किया करते थे.

एक दिन हुआ यह की हम घर मैं सेट ही हो गये थे की दो दिन मैं ही सोनू को अपने गाँव से कॉल आ गया ओर उसके पिताजी ने उसे बुलाया था क्योंकि उसके पिताजी की एक छ्होटी सी दुकान थी जिसमे चोरी हुई थी ओर अब सोनू को उन्होने जल्दी से बुलाया था ओर सुप्रिया भी उसके साथ जाना चाहती थी, लेकिन सोनू ने उससे यही पर रहने को कहा क्योंकि घर का ओर हमारा ख्याल कौन रखता. वो उससे बोला की वो जल्द से जल्द लोतने की कोशिश करेगा.

फिर अंकल ने सोनू को कुछ पैसे दिए ओर सोनू शाम को ही अपने घर पर चला गया ओर अब समस्या यह हुई थी की दो दिन बाद बुआ , अंकल ओर निखिल को बुआ के गाँव जाना था. उनकी देवरानी की गाओड़ भराई के लिए उनका प्लान यह था की मैं सोनू ओर सुप्रिया के साथ घर पर ही रुकने वाली थी, लेकिन अब सोनू वहाँ पर नही था इसलिए सिर्फ़ वो हम दोनो पर पूरा घर छोड़कर नही जा सकते थे. तो फ़ैसला यह हुआ की बुआ ओर निखिल जाएँगे.मैं ओर अंकल घर पर ही रुकेंगे क्योंकि गोड भराई मैं अंकल क्या करेंगे? ओर वो बुआ को अकेले भी नही भेज सकते ओर मैं तो उन लोगो को पहचानती भी नही थी इसलिए मैं उनके साथ नही जा सकती थी ओर सब सुप्रिया के साथ भी नही जा सकते थे क्योंकि घर का काम, पेड़ पोढ़ो को पानी वगेरह देना होता है इसलिए हमारे साथ एक मर्द रुके इसलिए अंकल वही पर रुक गये. वो लोग वैसे भी सिर्फ़ दो रातो के लिए गये थे.

तो हमारा पहला दिन बहुत अच्छा गया, लेकिन मैं गौर कर रही थी की अंकल सुप्रिया के साथ कुछ ज़्यादा ही मस्ती मज़ाक कर रहे थे ओर सुप्रिया भी उनसे बात करते वक़्त बहुत शरमाती. अब रात हुई ओर हमने खाना खा लिया ओर 10 बजे सुप्रिया अपना सारा काम ख़त्म करके सोने चली गयी. हुमेशा अंकल ओर निखिल हॉल मैं सोते थे ओर बुआ ओर मैं अंदर.

आज भी हमे वैसे ही सोए थे ओर मैं अकेली अंदर ओर अंकल अकेले हॉल मैं ओर सुप्रिया अपने क्वॉर्टर मैं सो गयी. मुझे उस रात जल्दी नींद नही आ रही थी ओर मैं बस बिस्तर पर करवाते बदल रही थी. रात को करीब 11.30 बजे मुझे प्यास लगी तो मैं अपने कमरे से बाहर गयी.

मैने देखा की अंकल अपने बिस्तर पर नही है. मैं जब किचन मैं गयी तो मुझे किचन के अंधेरे मैं पास के क्वॉर्टर के बंद दरवाजे के अंदर की लाइट चालू दिखी ओर अंदर से हल्की सी बातो की आवाज़ भी आ रही थी. मैने किचन की लाइट चालू किया ओर पानी पीने लगी ओर अब अचानक अंदर से आने वाली आवाज़े बंद हो गयी. मैने लाइट को बंद किया ओर बाथरूम मैं चली गयी ओर मैने बाथरूम से बाहर आने के बाद देखा तो अंकल हॉल मैं अपने बिस्तर पर लेते हुए थे.

अब उन्होने भी मुझे देखा लिया तो मैने उनसे पुचछा की आप कहाँ गये थे? उन्होने कहा की मैं सिग्गेराते पीने बाहर गया था, क्यो तुम अभी तक सोई नही? तो मैने कहा की मुझे अंदर नींद नही आ रही है तो उन्होने कहा की अरे तुम भी बाहर आकर सो जाओ. फिर मैने अपनी चादर उठाई ओर बाहर आकर अंकल के पास मैं सो गयी ओर अंकल के साथ कुछ देर बाते करने के बाद मुझे नींद आ गयी.

उस रात मैं फिर से नही जागी. दूसरे दिन सब कुछ ठीक तक था ओर पूरा दिन कुछ खास नही था, लेकिन अंकल ओर सुप्रिया की मस्ती आज बहुत जोरो से चल रही थी. फिर रात को हमेशा की तरह सुप्रिया ने 10 बजे अपना पूरा काम ख़त्म किया ओर सोने चली गयी ओर मैं आज भी अंकल के पास लेट गयी, लेकिन मैं अंकल के साथ कुछ देर बाते करने के बाद सो गयी. फिर रात को अचानक से मेरी आँख खुली तो मैने देखा की अंकल मेरे पास नही थे ओर वो आस पास भी कही नही थे. मैने जब घड़ी मैं देखा तो एक बाज रहे थे ओर दरवाजे की कुण्डी भी अंदर से लगी हुई थी ओर अब मेरी नींद पूरी तरह से भाग गयी थी. मैं किचन की तरफ गयी तो मैने देखा की आज भी उस क्वॉर्टर की लाइट अंदर से चालू थी ओर अंदर ज़ीरो बल्ब भी था. मैं दरवाजा के पास गयी ओर अब मैने उसे धक्का देना चाहा तो दरवाजे की अंदर से कुण्डी लगी हुई थी.

फिर मैने दरवाजे पर अपना एक काम लगाया तो अंदर से कुछ आवाज़ भी नही आ रही थी बस पंखे की आवाज़ आ रही थी. फिर मैं खिड़की की तरफ गयी ओर खिड़की को धक्का दिया तो वो थोड़ी सी खुल गयी ओर मैने अंदर देखा की सुप्रिया चटाई पर पीठ के बाल लेती हुई थी उसके बाल खुले हुए थे ओर उसने उसका गाउन नीचे से उपर किया हुआ था ओर उसकी दोनो आँखे बंद थी ओर दोनो पर फैले हुए थे. परो के बीच मैं अंकल पूरे नंगे होकर उस पर चढ़कर उसे धीरे धीरे धक्के देकर चोद रहे थे. अब मैं वैसे ही खड़ी रही ओर देखने लगी. अंकल जैसे ही ज़ोर का धक्का देते तो सुप्रिया उपर हो जाती. वो लोग पूरे रूम मैं अपनी चुदाई कीट हॅप ताओ आवाज़ को फैला रहे थे.

फिर कुछ देर बाद सुप्रिया उनको बस ओर नही बस करो कहने लगी तो अंकल ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर छोड़ने लगे ओर उसे लंड के जल्दी जल्दी आने जाने के दर्द से तकलीफ़ होने लगी ओर अब वो ज़ोर से हिलने लगी ओर अब वो लोग खड़े हो गये, लेकिन अंकल ने छोड़ना नही रोका ओर अंकल बीच बीच मैं बढ़ता एक दम कम करके ज़ोर से लंड को अंदर घुसकर उस पर चढ़ते ओर वो अपनी पूरी कमर उठती. दोस्तो उसे देखकर लग रहा था की उसे ऐसे अलग अलग स्टाइल मैं सेक्स की आदत नही थी ओर वो बहुत दर्द महसूस कर रही थी. उसका सिर अब दीवार पर लग रहा था ओर अंकल उसे ज़ोर से चोद रहे थे.

तभी अंकल ने एक दम से अपने धक्के रोक दिए ओर मैने उनके चेहरे की तरफ देखा तो वो मुझे देख रहे थे. मैं जल्दी से नीचे झुक गयी ओर चुप गयी. अब मैने जल्दी से पिच्चे का दरवाजा धीरे से बंद किया ओर अपने बिस्तर पर दौड़कर लेट गयी ओर सोने का नाटक करने लगी.

अंकल ख़ड़ा लॅंड मेरी प्यासी चुत – 1 Uncle Ka Khada Lund Meri Pyasi Chut

मेरी मामा की लड़की, मेरा पहला झटका

मेरी मामा की लड़की, मेरा पहला झटका – meri mama ki ladaki mera pahela jhatka

मेरा नाम राजेश ह ओर म 24 साल का हू..म अंबाला (हरयाणा) म रहता हू. ओर इस साइट का रेग्युलर रीडर हूँ. ये मेरी फर्स्ट ओर एक रियल स्टोरी ह. ये स्टोरी मेरी ओर मेरी मामा की लड़की के साथ हुए सेक्स के बररे मे है. अग्र अंबाला, चंडीगार्ह या यमुननगर की कोई गर्ल या मॅरीड लेडी मुझसे सेक्स करना चाहे तो मुझे मेरी एमाइल आइ डी पे मैल करे..अब म स्टोरी पे आता हू..अग्र लिखने म कोई ग़लती हुई हो तो माफ़ करना.

ये बात जन्वरी की ह जब म अपने मामा क घर गया..मेरे मामा अंबाला सिटी म रहते ह..म उनके घर 6-7 दिन रहने वाला था कॉज़ मेरे मामा ओर मामी को गाव जाना था कुच्छ काम के लिए..उनकी एक ही बेटी ह ओर वो घर पे ही रहने वाली थी.मेरे मामा की लड़की का नाम नेहा ह ओर वो 18 साल की ह उसका साइज़ 32-29-30 ह उसे देखते ही मूढ़ मरने का दिल करने लगता ह..मामा ने मुझे फ़ोन करके सारी बात बीटीये दी थी ओर बोला घर का ध्यान रखना. जब म मामा क घर पहुचा तो मामा जा चुके थे..अब घर पे मैं ओर नेहा ही थे..हुँने पूरा दिन खूब मस्ती की लेकिन मैने उसे कुच्छ ग़लत नही किया..फिर रात को हमने खाना खाया ओर सोने जाने लगे तो वो बोली क हम दोनो एक साथ ही सोते है कयनकि वो अपनी आंटी क साथ सोती थी उसे अकेले म दर लगता था तो म उसके साथ सोने च्ला गया..उम एक ही कंबल म थे जो दौबलेबेड क लिए थे..हम दोनो सो गये..जन्वरी का मंत था तो धांड ब जादा ही होती ह. रात को नेहा को ठंड लगने लगी तो वो मुझसे लिपट गयी. मुझे ब टा नही च्ला जब मेरी आँख खुली तो देखा नेहा मुझसे लिपटी हुई ह. मेरी बॉडी म जैसे करेंट दौड़ गया..

मुझे ब उसका ऐसा करना अच्छा लगने लगा. मेरी आँख एक दम से खुल गयी ओर मेरा लंड टाइट हो गया..म गरम होने लगा था मैने ब उसे बाहों म लके लिया ओर एक हाथ से उसकी गांड को हल्के से सहलाने लगा..ओर उसकी चुत की तरफ ब अपनी उंगलिया च्लने लगा..मैं ये सब बड़े प्यार से कर रा था. वो शयड उठ गयी थी ओर उसे ब अच्छा लगने लगा था कयनकि हम दोनो एक दूसरे से लिपटे हुए तेओर कोल्ड का मौसम था..20मीं क बाद मुझसे कंट्रोल नही हुआ तो मैने उसका लोवर ओर पेंटी को अर्राम से थोड़ा नीचे कर दिया ओर वो उसकी झांगो से नीचे तक कर दिया. वो अभी ब चुप छाप लेती थी. मैने उसकी चुत को सहलाना स्टार्ट कर दिया तो वो गीली हेँ लगी..

म उसकी चुत क दाने को अपनी उंगली से सहलाने लगा ओर उसका हाथ अपने लोवर क उपप्र से ही लंड पे रख दिया थोड़ी देर म उसने मुझे कस क पकड़ लिया म समझ गया क वो झाड़ गयी ह ओर वो जाग रही ह..अब मैने भी अपना लोवर ओर अंडरवियर उतार दिया ओर नंगा हो गया ओर अपना लंड उसके हाथ म दे दिया ओर उसके बूब्स को दबाने लगा..वो अभी ब चुप छाप लेती हुई थी..मैने उसे बोला क ऐसे तुम्हे मजा नही आएगा अपनी आँखे खोल लो ओर वो उठ गयी..मैने लाइट ऑन की ओर उसपे टूट प्डा..म उसके बूब्स दबा रा था ओर अपने हाथ से मसल रा था..वो सिसकिया लेने लगी..मैने उसकी टी-शर्ट को उतार दिया ओर उसकी ब्रा ब उतार दी ओर उसके बूब्स को चूसने लगा. कुया गूरे-गूरे बूब्स थे उसके म उनको लगतर चूस रा था ओर काट रा था. म एक को चूस्ता ओर दूसरे को अपने हाथ से सहलाता. इस बीच मैने उसके नीचे क कपड़े पूरी त्राह निकल दिए ओर वो अब बिल्कुल नंगी लेती थी. सच मे दोस्तो क्या लग रही थी वो जैसे मुझे कोई अप्सरा मिल गयी हो. उसके बूब्स चूसने क बाद म उसकी चुत पे आ गया उसकी चुत क्लीन शेव थी उसने 2-3 दिन पहले सॉफ की थी..म उसकी चुत को पहले देखता रा उसे प्यार करने लगा..अपने गाल उसकी चुत पे रख क प्यार करटा रा..उसे ये करना बहोत अच्छा लगा फ्र म उसे चूसने लगा अब वो और ब जादा एक्शिटेड !

हो गयी ओर आ…आ… करने लगी..मुझे ब जोश आने लगा म उसकी चुत म अपनी जीभ को डालके चूस रा था ओर वो एक बार फ्र झाड़ गयी..अब मैने उसे अपने लंड चूसने को बोला वो चूसने लगी..सच मे क्या फीलिंग थी..10मीं म उसके मूह म झाड़ गया उस्नी मेरा माल थूक दिया..अब हम फ्र से एक दूसरे को चूमने लगे ओर उसकी चुत को सहलाने लगा अब मेरा दोबारा खड़ा हो गया..मैने उसको नीचे लेटया ओर उसकी चुत पे ओर अपने लंड पे आयिल गया क उसकी चुत पे अपना लंड रख दिया उसने मेरी आर्म्स को टाइट पकड़ा हुआ था ओर उसकी आँखे बंद थी..

मैने पहला झटका मारा ओ मेरे लंड का टोपा उसकी चुत म च्ला गया ओर वो चिल्लाने लगी..मैने उसके लिप्स प किस करने लगा ओर एक ओर झतका मार दिया अब मेरा हाफ लंड उसकी चुत म था..उसकी सील टूट गयी ओर खून निकलने लगा..वो दर्द से छटपटा रही थी लेकिन मैने लास्ट शॉट क साथ पूरा लंड उसकी चुत म कर दिया..उसकी आँखों से आँसू आने लगे..म कुछ देर ऐसे ही लेता रा ओर उसे किस करटा रा ओर उसके बूब्स दबाता रा..जब वो नॉर्मल हुई तो मैने बढ़ता ब्डा दी..अब उसे ब मजा आने लगा था वो आआहह.आआआआअहह….हााआअ…आआआआअहह..मॅर गयी…ओर ज़ोर से……आआआआअहह…आआआआआअहह…..एस.एस……..कर रही थी 25 मीं छोड़ने क बाद म उसकी चुत म ही झाड़ गया ओर इस दौरान वो 2 बार और झाड़ गयी थी..उसने मुझे अपनी बहो म भर लिया ओर हम ऐसे ही लेते रहे..

फ्र हम अलग हुए उसने खून देखाओर बोली क मेरी सील टूट गयी..मैने पुचछा तुम्हे मजा आया उसने खा बहोत मजा आया..ये हुमारा 1स्ट्रीट ओर आक्सिडेंटल सेक्स था तो जादा वाइल्ड नही हो पाए..बीटी इसके बाद हमने खूब डुमदार सेक्स किया..वो म आपको नेक्स्ट सॉरी म ब्टौँगा..मेरी स्टोरी कैसी लगी प्ल्ज़ कॉमेंट जरूर करना..मेरी आइ डी ह कोई लड़किया कोई मॅरीड लेडी मुझसे सेक्स करना चाहे तो मैल करे..सब सीकरेट रहेगा

मेरी मामा की लड़की, मेरा पहला झटका – meri mama ki ladaki mera pahela jhatka

पाकिस्ठानी भाभी और ड्राइवर को ब्लोवजोब

पाकिस्ठानी भाभी और ड्राइवर को ब्लोवजोब – Pakistani Bhabhi Blowjob

यह ज़रूर नही है की सिर्फ़ इंडियन भाभी ही छुड़वाने की प्यासी होती है. भाभी तो सब जगह पर प्यासी होती है क्यूंकी मर्द को जवान चुत लेनी होती है और इस वजह से वो बीवियो की चुते कम पेलते है. और उनकी प्यासी बीविया दूसरे मर्दो के साथ चुदया लेती है. आज आप एक पाकिस्ठानी भाभी जी को मोटा लंड अपने मूह मे डाल के चूस्ते रहे है इस हॉट ब्लोवजोब.

यह भाभी का हज़्बंद भी उसे नही छोड़ता है एक बचे के हो जाने के बाद. और भाभी जी बहुत महीनो से अनचुद़ी हुई थी. ऐसे मे ड्राइविंग के टूटर के पेंट के उभार को देख के वो खुद को कंट्रोल नही कर पाई. और एक दिन उसने उसकी जाँघ पर हाथ मार दिया. ड्राइविंग टूटर भी समझ गया की इस भाभी को कार सीखने के साथ साथ एक्सट्रा सर्विस भी लेनी है. उपर से यह भाभी थी भी पैसेवली इस लिए उसे चोद के कुछ टिप्स भी मिल सकती थी. ड्राइविंग टूटर ने भाभी की तरफ देखा तो वो शर्म से आँख नही मिला पा रही थी. इस टूटर ने भाभी का हाथ ले के अपने मोटे लोड के उपर रख दिया. और मोटा लंड टच होते ही भाभी की आँखो मे चमक सी आ गई.टूटर कुछ नही बोला और उसने अपनी कार को सिटी के बाहर होते हुए जंगल के रास्ते पर ले ली. फिर उसने कार को ऐसी जगह पार्क किया जहा से वो 100-100 फीट दूर सभी दिशाओ मे देख सकता था. और फिर ज़िप को खोल के अपना मोटा लंड बाहर निकल दिया. भाभी को यहा दर लग रहा था सेक्स करने मे लेकिन वो ब्लोवजोब के लिए एकदम रीडी थी. उसने अपना मूह खोला और यह मोटा लंड ले लिया. और फिर जैसे कॅंडी को चूस रही हो वैसे वो इस लोड को ब्लोवजोब देने लगी. इस हॉट प्यासी भाभी ने लंड को तब तक चूसा जब ताज उसमे से विरी का गाढ़ा फ्लो बाहर नही आया. और विरी की एक एक बूँद को इस गरम भाभी ने अपने गले के नीचे उतार लिया. ड्राइवर ने लंड को पेंट मे घुसेड के ज़िप बाँध कर डाली. फिर कभी चुदाई की प्लॅनिंग करेंगे यह कह के वो दोनो वापस सिटी की बौड़नरी मे घुस गये.

पाकिस्ठानी भाभी और ड्राइवर को ब्लोवजोब – Pakistani Bhabhi Blowjob

स्टूडेंट की सेक्स की क्लास

स्टूडेंट की सेक्स की क्लास – Hindi desi stories
हेलो दोस्तो आज मे आपको अपनी एक और रियल स्टोरी बतने जर आहा हू. दोस्तो ये स्टोरी आपको केसी लगी ज़रूर बठाना

मई पिछले महीने अपने घर पे बेठा था टीवी देख रहा थी घर पर कोई नही था मे अकेला थे. मेरे सामने वाले घर पर एक लड़की रहती हे जो 12 वी मे पढ़ती हे. कभी कभी उसे कुछ ना आअए तो मुझे पूछने चली आती हे मे साइन्स बट अच्छे से पढ़ता हू उस दिन जब मे घर पे अकेला था तब वो आई उसने रीड टशहिर्त और नीचे केप्री पहन न्यू एअर थी उसे साइन्स मे एक टॉपिक समाज नही आ रहा था तो वो पूछने आई थी

टॉपिक था बच्चा केसे होता हे माले और फीमेल केसे बनता हे मे उस दिन घर पे अकेला ही था तो मेने सिर्फ़ ट्रॅक पहन रखा था अंदर कुछ नही पहना था. मे सोफे पर बेठा था और वो मेरे बाजू मे आके बेठ गई अकदम करीब आके उसके पर मेरे पर से टच हो रहे थे और मेरी कोहनी उसके नाज़ुक छोटे छोटे बूब्स को चुसके आएसए हम दोनो बेठे हुए थे मे उसे टॉपिक संजने लगा उसमे एक वर्ड आया की लिंग

उसे समाज नही आया उसने पूछा की ये क्या हे मुझे समाज नही आया मेने उसे बताया की उसका मेटल्ब माले और फीमेल का गुप्त पार्ट पिसाहब करने की जगह. पूरेुष का एक लिंग पार्ट होता हे सिस्न और फीमेल का 2 पार्ट होता हे एक योनि और दूसरा स्तन उसे स्तन वर्ड समाज मे नही आया उसने फिर पूछा की ये कोन सा अंग होता हे. फिर मे भी कन्फ्यूज़ हो गया मे सोचने लगा की क्या सच मच इसे नही पता या आएसए ही ये मुजसे पूछ रही हे मे सोच ने लगा अब केसे संजौ.

फिर मेने उसे संजया जहा से बची मा का दूध पीते हे उसे स्तन कहते हे फिर उसने मुजसे सिस्ना क बारएमए पु6 मे ने उसे वो भी संजया. और सिस्ना से क्या होता हे वो भी संजया जब मे संजा रहा था तब मेने अपने पर मे कू6 महसूस किया वो अपने अंगउते को मेरे पर पे घुमा रही थी और काफ़ी करीब बेठी थी मेरी कोहनी उसके बूब्स के बिल्कुल पास थी. वो थोड़ी थोड़ी देर मे जान बुजकर मेरी कोहनी से अपने बूब्स को सहला रही थी.

मेरा भी लंड धीरे धीरे टाइट हो रहा था मेने सिर्फ़ ट्रक पहन रखा था तो उसकी वजह से मेरा लंड का शेप ट्रॅक के अंदर से सॉफ दिखाई दे रहा था. उसकी निगाह अब मेरे टाइट लंड पर टिक गई वो बार बार उसे 6अन की कोसिस कर रही थी उसने अपना एक हाथ मेरी जंग पर रख दिया लिखने के बहाने फिर धीरे धीरे वो अपना हाथ मेरे लंड की और बढ़ने लगी. मे और एक्शिटे होने लगा अब मेरा लंड अकदम टाइट हो गया था उसकी नियजरे उसीके उपर थी.

आख़िर उससे नही रहा गया और मुझे पूछने लगी सिर ये आपको क्या हुआ हे कू6 तकलीफ़ हे मेने कहा नही जब एक माले एक्शिटे होता हे तो उसका सिस्ना आएसए टाइट हो जाता हे और योनि मे जाने क लायक हो जाता हे. तो उसने मुजसे पूछा की टाइट केसे होता हे इतनी छोटी चीज़ बड़ी केसे हो जाती हे? तो मेने कहा हमारे सिस्ना की चाँदी और नसे फूलने लगती हे और डंडे की तरह तां जाती हे सिर मेरी तो कुछ संज नही आ रहा हे.

प्लीज़ आप मुझे एक बाअर आएसा दिखाई ये ना तभी मुझे समाज आअएगा मे किसी को नही बटौगी इससके बड़े मे. मेने माना कर दिया और कहा नही ये मे नही कर सकता तो उसने मेरा लंड अकदम टाइट पकड़ लिया और कहा प्ल्ज़ सिर मे किसी को नही कहूँगी प्लीज़ उसके पकते ही जेसे मेरे लंड को 440 का झटका लग गया. मे भी अब आउट ऑफ कंट्रोल हो गया मेने कहा ठीक हे पर किसिको बठाना मॅट.

तो उसने कहा ठीक हे फिर धीरे धीरे मेने अपना ट्रक उतार दिया और मेरा ठाना हुआ लंड उसकी आखो के सामने था वो शोक हो कर मेरे लंड को देखा रही थी और अपने होठ (लिप्स) दंटो मे दबा रही थी फिर थोड़ी देर बाद वो मुजसे बोली सिर क्यामे उसे 6उ सकती हू मे भी मन मे यही चाहता था… मे ने कहा ठीक हे तो उसने मेरे नंगे लंड को अपने नाज़ुक हाथो मे लिया ऑरा एज पी6ए करने लगी मेरा भी मन कर रहा था की उसके बूब्स को दबौउ.

फिर मेने भी धीरे धीरे अपना हाथ उसकी झांग पर फेरने लगा मेरे आएसा करते ही वो एक्शिटे होने लगी और झोर से मेरे लंड को दबाने लगी फिर क्यट हा मेने भी अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और उसके नाज़ुक और छोटे छोटे बूब्स दबाने लगा फिर मेने उससे अपना टी-शर्ट उपर करने को कहा तो उसने तो अपना टशहिर्त ही उतार दिया और अंदर का पेटिकोट भी उतार दिया क्या गोरे गोरे छोटे बूब्स थे उसके छोटी छोटी निपल मेरे तो मुहमे तुरंत पानी आगया मे तुरान उसके निपल चूसने लगा.

ज़ोर ज़ोर से मेने उसके निपल चूसने लगा वो मेरे लंड को अब ज़ोर से पकड़ कर दबाने लगी करीब आधे घंटे तक मे उसके बूब्स चूसने लगा. उसके बाआड़ मेने अपना लंड उसके मूह मे दे दिया अब वो मेरा लंड माधोस होकर चूसने लगी जेसे चोकोबार आइस करीम खरही हो मे भी पागल हो रहा था. करीब आधे घंटे तक वो चुस्ती रही और मे उसकी चुत मे उंगली डाल के सहलाने लगा मेने उसे फिर पूरा नंगा कर दिया और उसकी चुत मे उंगली डाल कर छोड़ने के लिए तैयार कर ने लगा

उसकी चुत मेसए पानी लगातार तपाक रहा था फिर थोड़ी देर बाद मे कॉंडम ले आया और अपने लंड मे चढ़ा क उसको छोड़ने की तैयारी करने लगा वो अपनी टाँगे फेला कर लेट गई और मे ने धीरे से अपना लंड उसकी चुत पे रखओर धीरे धीरे धक्का देने लगा वो दर्द से चिल्लाने लगी तो मेने उसका मूह बंद कर दिया. और एक ज़ोर से धक्का उसकी चुत मे किया और मेरा पूरा लंड उसकी चुत मे घुस गया.

उसका मूह खुला का खुला रह गया दर्द की वजह से अब खून भी निकल ने लगा वो दर गई तो मेने कहा ये कोई बड़ी बात नही हे पहली बार आएसा होता हे और उसके बाद मे उसे छोड़ने लगा अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था. वो भी उछाल उछाल कर चुदया रही थी आधे घंटे ताल मेने उसकी चुदाई की उसके बाद मे झड़ने वाला था तो मेने कॉंडम निकल दिया और अपना लंड

उसके मूह मे दे दिया और सारा पानी उसके मूह मे चोद दिया आआअहह. बहुत मज़ा आया जवान चुत को चोद क फिर 1 वीक तक मे उसे रोज छोड़ता रहा ऑरा क वीक मे ही उसके बूब्स बड़े बड़े हो गये अब वो पूरी औरात बन गैट ही. तो इस तरह एक स्टूडेंट की सेक्स की क्लास ख़त्म हुई
स्टूडेंट की सेक्स की क्लास – Hindi desi stories

काला साया – रात का सूपर हीरो 2

काला साया – रात का सूपर हीरो – 2
इतना कहके कंचन अपने गीले सारी से खिकध को झधते हुए बाएक में काला साया के साथ सॉवॅर हो जाती है….बाएक काफ़ी तेज़ी से कक़ची सड़क और बगल के खेत जुंगलो से होते हुए चलने लगता है….अचानक काला साया की बाएक फिसल जाती है और ऊसे बीच में ही बाएक रोकनी पढ़ती है “अफ हो लगता है ये सड़क बंद हो चुकी है यहा दलदल का भी ख़तरा हो सकता है”…काला साया की बात सुनके कंचन घबरा जाती है की अब वो घर कैसे जाएगी? ऊस्के बाकचो की दवाई ख़त्म हो गयी थी…कंचन ने जब काला साया को अपना कारण बताया तो वो भी सोच में डूब गया की करे तो करे क्या? एक तो ये ना थमने वाली बारिश उपर से बढ़ता तूफान…”देखो कंचन ये मौसम शायद सुबह 4 बजे तक चल सकता है तब्तालाक़ तुम्हें कही आज तो तहेरना ही परेगा वरना ऐसी हालत में अपने बस्ती जाओगी कैसे?”…..कंचन भी कही हड़त्ाक मायूस होके काला साए की बात पे हामी भरने लगी

“ये लो तुम अपने घर पे फोन कर दो”……काला साया ने तुरंत मोबाइल कंचन को पकड़ाया…कंचन ने अपने घर पे फोन करा और मालूम किया की ऊस्के बाकछे कैसे है? ऊसने अपने एक सहेली को फोन करके अपना हाल बताया ऊस्क इप़ड़ोस वाली थी ऊसने कंचन को समझाया की वो कहीं तहेर जाए आज की रात कहीं कांत ले…कंचन को भी यही ठीक लगा वक़्त के हाथो वो मज़बूर हो गयी लेकिन ऊसे काला साया पर पूरा भरोसा था काला साया ने इससे पहले भी ऊसे एक बार बचाया था ऊस्के पाती के ज़ुल्मो से और तबसे वो काला साया को अपना गार्डियन मानती थी…

कला साया अपने चेहरे पे मुकोता लिए सहेर का गश्त लगता था…और बढ़ते वारदटो को रोकता था…लेकिन आज वो भी इस मुसलाधार बारिश में फ़ासस चुका था…अचानक ऊसे दूर की वो वीरान बस्ती दिखी…काला साया को एक सुझाव मिला..”कंचन आज रात हुमको यही कातनी परेगी तुम परेशन मत हो मैं तुम्हारे साथ हू”….इतना कहके काला साया बाएक को घस्सीटते हुए ऊस वीरान बस्ती के पास आया…”ह्म दूर दूर तक कोई नही और ऐसी बरसाती रात में होगा भी कौन? चलो जल्दी से अंदर चलते है”……काला साया की बात सुनके एकपल के लिए कंचन सहें उठी ऊसे वोही आत्माओ वाली बात पे ड्ऱ था पर वो जानती थी काला साया जब साथ है तो ऊसे वो कुछ होने तो नही देगा
वो बिना कुछ कहें काला साया के साथ ऊस सबसे उचे वाले झोपरे में घुस्स गयी…बरसात काफ़ी तेज़ हो गाइइ और बरसात का पानी काफ़ी ज़्यादा तेज़ हो गया….एक झोपड़ी में बाएक घुसाके काला साया कंचन के संग उक्चे वाले झोपडे में घुस्स गया….अंदर आते ही लोहे का एक दरवाजा जो बेहद पूरेाना था ऊससे काला साया ने झोपड़ी को बंद कर डाला…कंचन ठंड से कनपने लगी

काला साया ने लाइटर जलाया और ऊससे एकहट्टा करी बड़ी मुस्किल से सुखी घससो पे आग लगाई अब पूरे कमरे चकाचोँद रोशनी थी एक छेद से बाहर के बिजली की रोशनी बीच बीच में पार जाती…इस बार कंचन ने बड़ी ही गौर से काला साया को देखा जो अपने चेहरे को हार्वक़्त एक मुकोते से धक्कें रहता है और ऊस्के पूरे चेहरे पे कालिक जैसा कुछ लगा है बस ऊस्के गुलाबी होंठ दिख सकते थे बाकी ऊस्के बदन पे एक लंबा सा ब्लॅक कोट और एक क़ास्सी जीन्स जिसकी चाँदी वाले काँटे बने लोहे का बेल्ट चमक रहा है…काला साया कहरा होके पास से एक बंदूक निकलके पास रखता है और फहीर एक लंबा 8इंच का चाकू

कंचन तोढी सहें उठी फहीर ऊसने बड़े ही गौर से ऊस बंदूक की ओर देखा इतने में काला साया ने कंचन की चुप्पी तोधी “अर्रे तुम तो पूरी भीग गयी हो लो मेरा कोट धक लो इतना कहके काला साया अपने बदन से कोट उतार देता है ऊस्के बदन पे सिर्फ़ एक काली बानयन होती है…”आपको ठंड लग जाएँगी”…कंचन ने अपने बाल झधते हुए कहा…”मेरे अंदर इतने बदले की आग है की मुझे हरपाल गरम महसूस होता है”…..कंचन मुस्कुरके ऊस्के हौसले की तारीफ़ कराती है

कंचन इस बार अपने गीले सारी और आधे गीले ब्लाउस और पेटिकोट को पल्लू से सॉफ करने लगती है….अचानक काला साया की निगाह ऊस्के छातियो के काटव पे पार्टी है ऊस्की गोल गहरी नाभी के नीचे से निकले पायट पर कितने स्ट्रेच मार्क्स थे जो शाया ऊस्के बाकचा पैदा होनेके बाद ऊसे परे होंगे….कंचन मुस्कुराए काला साया का कोट पहन लेती है….काला साया का लंड अकड़ने लगता है जिसे कंचन देख लेती है वो इस बात को भाँपके मॅन ही मॅन मुस्कुराने लगती है वो जानती है काला साया कभी भी अपने ज़्यादती ज़िंदगी के बार्िएन में नही बताता

कला साया बार बार कंचन के मोटे पिछवाड़े को पेटिकोट के बाहर से ही डेक सकता है की वो कितनी बड़ी है वो बीच बीच में अपने लंड को दबा देता है जीन्स के उपर से पर ऊस्का उभर खंभक्त कम हो ही नही रहा….अचानक बदल बड़ी ज़ोर से गारज़ता है कंचन फहीर धीरे धीरे काला साया से बात करने लगती है की वो ऊसे तो कम से कम अपन चेहरा दिखा सकता है वो कौन है?…काला साया मुस्कुरके माना कर देता है की वो ये बात सबसे छुपाके रखता है..ऊस्के दिल में लगी जो आग है वो इस शहेर जुड़ी हुई है…और वो सिर्फ़ काला साया एक परिवार से बदला लेने के लिए बना है….ये सब सुनके कंचन बड़े ही दिलचस्पी से ऊस्की बात सुनती है अचानक…कंचन ठंड से बहुत ज़्यादा तिठुरने लगती है..काला साया ये बात जानके ऊसे आग के पास बैठने बोलता है..कंचन धीरे धीरे आग के पास बैठ जाती है

कला साया – तोढी गरमहत मिलेगी तुम्हें अब ठीक लग रहा है
कंचन – बहुत ज़्यादा ठंडा लग रहा है ऊन खंभक्तो की वजह से पूरे सारी पे खिचढ़ लग गया आज अगर आप ना आते साहेब तो
कला साया – अब तुम्हें दरर्ने की ज़रूरात नही कंचन वो लोग अब कोई नुकसान पहुचने के लायक नही रहेंगे और तुम फिकर मत करो मैं हूँ ना

काला साया धीरे धीरे कंचन से बात करने लगा अपने मॅन को समझाने लगा जो निगाहें ऊस्की कंचन के बदन पे गाड़ी सी हुई थी….”तुम इतनी खूबसूरात हो फहीर भी तुम्हारा नमार्द पाती तुम्हें कैसे चोद रखा है”….मेरी बात सुनके ऊस्के गाल गुलाबी हो गये “खैर ज़िंदगी में पहली बार किसी ने मेरी खूबसूराती की तारीफ की औ वो भी आपके मुँह से साहेब”…..कंचन बेहद खुश हुई वो अपने घर और अपनी शादी के बार्िएन में बतने लगी..लेकिन काला साया तो बार बार ऊस्के भारी चुचियो को देखने लगा…कंचन इसको भाँपने लगी वो घबरा भी रही थी पर ओस्से पता था की काला साया ऊस्के साथ कोई ग़लत काम नही करेगा

कंचन – साहेब अब आप शादी कर ही लो
कला साया – मुझ जैसे ख़तरनाक आदमी से कौन शादी करेगी जो हरपाल ख़तरो से खेलता है हाहाहा
कंचन – आप जैसा मर्द अगर मेरा पाती होता मैं सबसे खुशनसीब होती
कला साया – अच्छा ग वैसे कंचन तुमेहीं ग्रहस्ति से बाहर भी दोस्ती करनी चाहिए ताकि तुम्हारा मॅन बहले तुम भी किसी से तालुक़ात रखके ज़िंदगी के मज़े लो
कंचन – हम जैसी ग़रीब औरात से कौन प्यार करेगा सहाएब जो पाती के ज़ुल्म की मारी है…सिवाय दुख दर्द तक़लीफ़ के मिलता ही क्या है? एक आप ही हो जो हुम्हे समझते हो और मेरे बाकछे
कला साया – फहीर भी तुम इतनी जवान हो तुम्हें सोचना चाहिए
कंचन – क्या करे हमारा मोहल्ले में किसी को पता चला तो गुनाह की बात करने लगेंगे और शायद मेरी बदनामी हो जाए
कला साया – ह्म
काला साया – रात का सूपर हीरो – 2

हमारे दूर के रिश्तेदार की सेक्सी बेटी

हमारे दूर के रिश्तेदार की सेक्सी बेटी – 1

मेरे परिवार मे मैं मेरी आंटी अंकल और मेरी सेक्सी कज़िन हैं. वो हमारे दूर के रिश्तेदार की बेटी है. हमारे बीच कभी भी भाई बहेन का रिश्ता नही रहा. मेरी कज़िन बहुत ही सेक्सी है और मैं उससे बचपन से ही बहुत प्यार कराता था. मैं हमेशा उसे हसरात भारी निगाहून से देखता था पर कभी हिम्मत नही पड़ी के कुच्छ कह सकूँ. आज से 4 साल पहले मैं यहा मुंबई मे जॉब लगाने की वजह से आगेया. और यहीं पर रहने लगा. कुछ दीनूं बाद जब मैं गाव गया तो एक दिन मैं चाट पर डूप मे बैठा था तो मैने कविता ( माई यंगर सिस) को आँगन मे नहाते देखा और बस देखता ही रह गया. उसने कूचा भी नही पहना हुआ था उसके 36 के बूब बिल्कुल खड़े थे ओह गोद ई गॉन मद उसकी पुस्सी पर एक भी बाल नही थे मेरा मन कर रहा था के अभी जाकर उसे पकड़ लूँ पर नही कर सका. बस उसे नहाते और अपने बूब को रब करते हुए देखता रहा.

अब तो बी ए उसका ही चेहरा और वो दूध जैसा जिस्म ही मेरे सामने गूम्था रहता था. बस मेरे ख़याल मे एक ही बात आराही थी के बस ऐसी ही लड़की मुझे शादी के लिए चाहिए. पर कैसे. बस उस दिन मैने देसिडे किया की मैं एक दिन अपनी बेहन से शादी करूँगा और सुहाग रात मनौँगा. अब मैं कोई भी मौका नही चूड़ता था उसे और उसके खूबसूरात बूब्स को डेकहने का.

एक दिन मैने उससे कहा “कविता क्या तू मेरे साथ मुंबई चलेगी” तो उसने कहा ” क्यूँ नही पर मा और बाबू जी नही जाने डेंजे” तो मैने मन ही मन सोचा के हाँ ये भी सही है और उसके रिस्ते की भी बात चल रही है तो वैसे भी नही जाने देंगे.

तब मैने एक प्लान बनाया. और छुट्टियाँ ख़त्म होने की वजह से मुझे मुंबई भी जाना था. पर जाते वक्त मैं कविता से अकेले मे मिला और उसे गले लगा कर उससे ढेरे से कहा “मैं तुझे तेरी शादी से पहले मुंबई घूमने ज़रूर ले ज़ाऊगा” और उसके गाल पर एक प्यारा सा किस कर दिया. उसे तो लगा के भाया बस प्यार कर रहें हैं पर मैने तो अपनी होने वाली बीबी को किस किया था. बस उसके बाद मेरे प्लान का पहला चरण शुरु हो गया.

मई मुंबई आगेया. कुच्छ दिन बाद मेरे बाबूजी का फोन आया और उन्होने बताया के कविता की शादी टाई हो गयी है और टीन महीने बाद की डटे फिक्स हुई है. तब मैने कहा ” बाबूजी क्या मैं कविता को कुछ दीनूं के लिए मुंबई ला सकता हूँ उसकी अपने पसंद से शॉपिंग भी हो जाएगी और मुंबई भी घूम लेगी. पता नही शादी के बाद फिर मौका मिले ना मिले.” बाबूजी ने कहा ” ठीक है ले जा&##8221; मेरे तो ख़ुसी का ठिकाना ही नही रहा क्यूंकी अब मैं अपने बेहन के सटा कुच्छ दीनूं तक अकेला रह सकता था.

मैने सबसे पहले एक 1भक का फ्लॅट किराए पर लिया और ऑफीस से छुट्टी ले कर गाव चला गया अपनी होने वाली बीबी को लेने ई मीन बेहन को लेने. कुच्छ दीनूं बाद उसे लेकर वापस आगेया. आते वक्त बाबूजी और मा ने कहा के इसका अच्छे से खाया रखना वाहा पर कोई सीकायत नही मिलनी चाहिए तो मैने कहा ” आप लोग बिल्कुल चिंता मत कीजिए.”

और यहाँ आगेया. हम सुबह आता बजे के करीब अपने फ्लॅट पर बहुचे. मैने कविता से कहा ” कविता अब नहा कर आराम कर लो और मैं भी ऑफीस जाकर आता हूँ फिर साम को कहीं घूमने चलेगे. उसने कहा ठीक है और नहाने चली गयी.

अरे आप लोगो तो बठाना ही भूल गया मैने बाथरूम मे एक कमरा लगा रखा था ताकि मैं देखा सकूँ की मेरी बेहन के प्राइवेट जगह को अच्छी तरह से देखा सकूँ और जान सकूँ

मैं साम को जब ऑफीस से आया तो कविता पूरी तरह तैयार बैठी थी. टाइट सवार मे गजब ढा रही थी वो उसके 36 के बूब्स बाहर आने के लिए मचल रहे थे और उसके आस के तो क्या कहने. “ओह गोद क्या लग रही हो कविता” बस मैने ऐसे ही कह दिया और उसने एक प्यार सा स्माइल देदिया. मेरी तो घंटी ही बाज गयी. मैं उसके पास गे और उसके कंधो पर हाथ रख कर कहा ” क्या बात है कविता आज तो बस गजब ही ढा रही हू तुम्हे देखा कर तो सभी मारे ही जाएँगे” और उसके बाल खूल दिए. वो बस शमा के रह गयी. मैने कहा के मैं फ्रेसस होके आता हूँ. और बाथरूम मे चला गया और कॅम को देखने लगा … वाउ क्या पिक्चर्स तीन मैं पागल हुआ जा रहा था उसकी पुस्सी को देखा कर और सकसे जादा उसकी पुसी पर एक चुते से तिल को देखकर उससे बे जादा. उसके बाद मैं कविता के नाम की मूठ मारी और नहा कर बाहर आगेया.

“भैया आप लाते क्यूँ कर रहे हू” कविता ने कहा.

मैने कहा “क्यूँ”

“अरे 6 बजाने वाले है और मैं सोच रही थी के क्यूँ ना एक मूवी देखा ली जाए” कविता ने कहा.

मैने कहा “ओक”

और मैं जलदी से तैयार हो गया और हम दोनो मेरी बाएक पर मूवी के लिए निकले. घर से कुच्छ दूर जाने पर मैने बाएक रुक दी और कहा ” कविता क्या तुम दोनो तरफ पैर करके बैठ सकती हो मुझे बाएक चलाने मे प्राब्लम हो रहही है” उसने कहा “ठीक है” “अच्छे से पकड़ की भीयातो नही तो गिर्जाओगी” मैने कहा तो उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा दिया तो मैने कहा “अरे बाबा कमर पकड़ के बैठो ये मुंबई है गाव नही है ट्रफ़िक मे कट मारना पड़ता है गिर जाओगी.” तो उसने वैसा ही किया और मेरी कमर मे हाता डाल दिया अब मैं उसके दोनो बूब्स को अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था. और मज़ा लेने के लिया मैं हमेशा कट मराता और साथ मे ब्रेक भी तो मुझसे और चिपक जाती और मैं स्वर्ग का मज़ा लेने लगता. तूदी देर मे हम माल पह्ोछ गये. और “ओम शांति ओम” की टिकेट लेके मूवी देखी.

मूवी के बाद हम एक ज्वालेेरी शॉप पर गये और कुच्छ शॉपिंग की फिर कपादून की दुकान पर गये और कुच्छ साड़ियाँ ली और ुआपस आ गया.

दूसरे दिन मेरा सनडे ऑफ था तो हम सुबह तैयार हो कर घूमने चले गये. सबसे पहले गेट्वे ऑफ इंडिया गये वाहा से निकले तो एक होटेल मे ल्यूक किया और फिर इधर उधर घूमने के बाद हम साम को बंद स्टॅंड पहूच गये. वाहा पर सभी कपल्स मे ही बैठे थे और एक दूसरे मे खोए हुए थे. मैने कहा ” कविता ये है मुंबई की सबसे खूबसूरात जगह जहा पर सब बस समंदर की लहारून का मज़ा लेते हैं और एक दूसरे मे खो जारे हैं.” और मैने उसे कंधहो से पकड़ कर अपने उूर खीक लिया.उसने कोई आपत्ति नही की और कहा ” बाइया यहा पर सब एक दूसरे के सामने ये शककरते हैं कोई कुच्छ कहता नही ?” मैने कहा “अरे पागल ये प्यार है और यहा पर कोई किसी को कुच्छ नही कहता” “पर गाव मे तो सब…..” उसने कहा..

मैने मज़ा लेते हुए कहा “क्यूँ तू भी वाहा पर किसी के साथ मज़ा कराती थी क्या…” उसे शर्ंते हुए कहा धात!! और मुझसे अलग हो गयी. और हम घर वापस आ गया…

कुच्छा दिन ऐसे ही बीते.

एक दिन मैने उसके लिए एक शादी का लाल झोड़ा ले आया. कविता उसे देखते ही जैसे पागल ही हो गयी और मुझे अपने गले से लगा लिया और कहने लगी ये मेरे लिए है ना… तो मैने कहा मेरी जान ये तुम्हारे लिए नही मेटी बीबी के लिए है. तो उसका चेहरा उतार गया. तो मैने कहा ” क्या हुआ मेरी जान?” वो चुप रही .. तो मैने कहा ” पूच्ोगी नही वो है कौन?” कौन है वो ” उसने धीरे से कहा. मैने उसमे से चुनरी निकली और कहा उसके सिर पर उधा कर कहा वो “तुम हू” उसका चहता लाल हो गया ुआर वो गुस्से मे वाहा से चली गयी और अपने आपको कमरे मे बंद कर लिया. मैं बहूत दर गया के कहीं वो कुच्छ कर ना बैठे.

इसलिए मैं कमरे के धरवाजे पर गया और कहा ” कविता प्लीज़ मेरी बात सुनू मैं मज़ाक कर रहा था ” पर उसने दरवाजा नही ख़ूला. मैं बहूत परेसन था. तूदी देर बाद उसने दरवाजा खोला और बाहर आजाई और कहा ” आप सच मे मज़ाक कर रहे थे?” और अजीब नज़ारूण से मुझे देखने लगी. मुझे कुच्छा समझ मे नही आ रहा था. फिर भी मैने हिम्मत लगा कर कहा (क्यूंकी मैं ये मौका नही गवाना चाहता था) नही मैं मज़ाक नही कर रहा था” उसे बहूत ही बड़ा झटका सा लगा और उसकी आँखें भर आईं. फिर मैने कहा ” कविता मैं जनता हूँ तुम क्या शूच रही हू पर मैं क्या करूँ मैं तुम्हे बचपन से चाहता हूँ और मैने तुममे हुमेसा अपनी बीबी ही देखी है. मुझे नही पता ये सही है या ग़लत पर मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ और सिर्फ़ यही वजह थी के मैने हुमेसा अपनी शादी के लिए बाबूजी से इनकार किया. अब ये तुम्हारे उपर है के तू मेरे बड़े मे क्या सूचेटी हू” इतना कह कर मैं वाहा से चला गया.

हुँने साआँ तक कोई बात नही की करीब 10 बजे हमने डिन्नर किया और सोने चले गये. कारीक 12.00 को कविता मेरे पास आई और उसने कहा ” मैं अच्छी तरह से जानती हूँ के आप मुझसे बहूत प्यार करते हू पर ऐसा करते ये नही जानती थी और आपने कभी भी मेरे साथ कुच्छा भी ग़लत नही किया आज आप मुझसे शादी करना चाहते हू जो की कभी भी कोई समाज हमे इस तरह स्वीकार नही करेगा और मेरी शादी भी टाई हो चुकी है तो आप मुझसे शादी क्यूँ और कैसे कर सकते हो.” मैने धीरे से कहा “बस जब तक तेरी शादी का डटे नही आ जाता क्या हम शादी करके नही रहा सकते इस घर मे?” मुझे तूदा “वक्त चाहिए” उसने कहा और चली गयी.

सुबह करीब 5 बजे किसी ने मुझे छूआ. आवाज़ आई ” उठिए” ये कविता की आवाज़ थे. मैने घड़ी की तरफ देखा और कहा ” अभी तो सिर्फ़ 5 बाज रहे हैं” तो उसने कहा ” मुझे मुंबा देवी मंदिर जाना है. चलिए तैयार हो जाइए” मैने कहा ठीक है बगैर ये पूछे के “क्यूँ”. उठा और सीधे बाथरूम मे नहाने चला गया. और जब बाहर निकाला दो देखा ‘कविता!!!!!!!‚ वाउ क्या लग रही थी वो पिक डिसिज्नेर शादी और हाफ कट ब्ल्ौसे मे. मैने उसे कभी भी शादी मे नही डेकः था. जैसे कोई पड़ी हो उसके आधे बूब्स ब्ल्ौसे और हल्के शारी के झरोखे से बाहर की उूर झाँक रहे थे और उसके खुले हुए बाल हवा से हल्के हल्के उस रहे थे मैं उनमे इतना खोया था के कब मेरा टॉवाले नीचे गिर गया मुझे पता ही नही चला और मेरा 7.5 इंच का औजार खुले मे फाड़ फाड़ने लगा. ये डेका कर कविता हासने लगी और वाहा से जाते हुए कहने लगी संभलो अपने आपको. तब मुझे याद आया और मैं तावाले उठकत बाथरूम मे भगा.

बस यही सोचता रहा के लड़की हसी समझो फसी.

हमारे दूर के रिश्तेदार की सेक्सी बेटी – 1

चाँदनी रात मे अर्चना पनेरु की चुदाई

चाँदनी रात मे अर्चना पनेरु की चुदाई – Nepali Girl Archana Paneru Ki Chudai

हेलो दोस्तो, मेरा नाम कमाल है, मेरी उमरा 22 साल है ओर बिहार क एक गाँव का रहने वाला हूँ ओर ये मेरी पहली ओर सॅकी कहानी है. मैं 19 साल की उमरा से चुत का खेल खेलने की लालसा रखने लगा था. मेरी पड़ोस की अर्चना जो मामा की दूसरी बीवी थी, मामा की उमर ढल रही थी ओर अर्चना जवान ओर सेक्सी दिखती थी. अर्चना एक नेपाली लड़की थी मामा के पहली घरवाली से 3 बाकछे थे, जो अपने चाचा के साथ बाहर शहर मैं रहते थे. अर्चना को छोड़ने की लालसा मेरे मन मैं काफ़ी दीनो से थी ओर एक रात मुझे ये मौका मिल ही गया.

एक रात की बात है गर्मी बहुत थी तो मैं अपने आँगन मैं सोने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गर्मी ओर माक्चर की वजह से मैं काफ़ी परेशन था. यह सब मेरी मा देख रही थी, फिर उन्होने मुझसे कहा कीट उ यहा नही सो सकेगा इसलिए जा ओर अर्चना की चाट पर सो जा. अर्चना का घर पास मैं ही था तो मैने भी यही ठीक समझा ओर अर्चना के आहा सोने चला गया.

मैने रात मैं अर्चना के दरवाजे पर आवाज़ दी, तो उसने मेरा नाम पुचछा ओर दरवाजा खोल दिया ओर मेरे हाथ मैं तकिया ओर चादर देखकर बोली की ओहो चाट पर सोने आए हो, जाओ जाकर सो जाओ, आज गर्मी बहुत है. मैं भी सोच रही हंक ई चाट पर ही सो जौन. फिर मैं चाट पर चला गया. वाहा धीरे धीरे ठंडी हवा चल रही थी, मुझे जल्दी ही नींद आ गयी. रात के 1 बजे अचानक मेरी आँख खुली शायद मुझे ज़ोर से पेशाब लगी थी. मैं पेशाब करने के लिए जगह देखने लगा तो चाँदनी रात मैं अर्चना चाट के दूसरे किनारे पर सोती हुई दिखाई दी. फिर मैं चाट क एक कोने मैं पेशाब करने लगा जहाँ नीचे पानी निकालने के लिए पीपे लगा था.

फिर मैं अपनी जगह पर आकर बैठ गया ओर एक नज़र अर्चना की तरफ देखा तो चाँदनी रात मैं अर्चना गहरी नींद मैं थी ओर दोनो परो को मोआद रखा था ओर हवा की सरसराहट से अर्चना की सदी घुतने पर आ गयी थी. अचानक मेरे अंदर का शैठान जागने लगा ओर दिल मैं कुछ ज़्यादा देखने की लालसा जाग उठी, मैं धीरे से उठकर अर्चना के पास चला गया ओर उसके मोड हुए परो के पास बैठकर घुतने तक अटकी हुई सदी को घूर्ने लगा. फिर अचानक ही मेरे हाथ उठे ओर अर्चना की सदी का किनारा पकड़ कर मैने कमर तक उलट दिया ओर मेरी आँखो के सामने अर्चना की चुत के काले काले भरे हुए झांट थे.

मैने झांट पर हाथ फेरना शुरू कर दिया ओर झांतो के बीच हाथ फेराते हुए चुत का दर्शन कर ही लिया. फिर क्यट हा? मेरा लंड बहादुर टंकार खड़ा हो गया, मैने अपनी एक उंगली से चुत की झिल्ली हटाई ओर सहलाने लगा. अचानक अर्चना ने लंबी सांस खीची तो मैं थोड़ा सा घबरा गया ओर एक निगाह अर्चना के चेहरे पर डाली, मगर वो बेसूध होकर पड़ी थी.

फिर मैने अपना कार्यकरम चालू किया ओर अपना मूह अर्चना की चुत पर ले गया, वहाँ से हल्की हल्की गंध मेरी नाक मैं आने लगी. फिर मैने जीभ निकल कर अर्चना की चुत के दाने पर फेरने लगा ओर अर्चना की झांतो को दोनो उंगलियों से दो तरफ उलिएटते हुए, काफ़ी देर तक कभी चुत की झिल्ली ओर कभी चुत के दरवाजे की लाली को चटा. फिर मैने अपनी एक उंगली चुत के अंदर थोड़ी घुसा, तो अर्चना कसमसाई तो मैं जल्दी से पिच्चे हट गया. फिर अर्चना ने करवट ली ओर लंबी लंबी साँसे लेने लगी, लेकिन अब मेरे सामने अर्चना की गान्ड थी.

मैं उसे 5 मिनिट तक घूराता रहा ओर अगले ही पल मेरे हाथ चूतड़ को सहलाने मैं व्यस्त हो गये. इधर मेरा बहादुर लंड पूरे उफान पर था. फिर मैने जैसे ही अर्चना की गान्ड की दरार मैं उंगली डाली तो अर्चना हड़बड़ा कर उठ गयी ओर झुंझला कर बोली ये सब क्या है? मैं गड़बड़ा गया ओर जल्दी से बोला अर्चना मैं पेशाब करने के लिए उठा था, तो देखा की आपकी सदी उपर उठी थी. बस उसे ही ठीक करने के लिए आपके पास आ गया था. अर्चना सहम सी गयी ओर बोली ऑश ऐसी बात है.फिर मैने अपनी अर्चना के चेहरे को पढ़ा ओर बोला की अर्चना अगर आप बुरन आ मानो तो एक बात कहूँ. फिर अर्चना ने इरादे को समझते हुए कहा बोलो. फिर मैने कहा अर्चना आपके चूतड़ बहुत मस्त है, ऐसे तो मैने किसी कुँवारी लड़की के भी नही देखे. फिर अर्चना ने शर्मकार कहा की भाग ओर मैं समझ गया की मेरा तीर सही निशाने पर जा रहा है.

मैने कहा की सच अर्चना देखो ना तुम्हारी खुली गान्ड देखकर मेरे लंड का क्या हाल है? ओर झट से मैने अपना 7 इंच लंबा ओर 2 इंच मोटा लंड खोलकर अर्चना के सामने कर दिया. ये देख पहले तो अर्चना ने नाटक किया ओर फिर उसकी आँखो मैं भी मैने सेक्स की चमक सॉफ देखी ओर हिम्मत करके लंड को उसके होतो तक ले गया. फिर क्यट हा? उसने भी लॉलिपोप समझकर चूसना शुरू कर दिया, फिर 5 मिनिट के बाद हम दोनो 69 की पोज़िशन मैं आ गये ओर एक दूसरे का चातने ओर चूसने लगे.

फिर 10 मिनिट के बाद लंड ओर चुत ने हल्का हल्का पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, अर्चना मस्त होती गयी ओर फिर उसने कहा की जल्दी से चोदा ना ओर मैने सीधा होकर अर्चना के दोनो परो को फैलाया ओर उनके काले काले झांतो के जंगल को दूसरी साइड मैं उलट कर चुत के दरवाजे से रिस्ते हुए पानी को अपनी उंगली से चुत के किनारे वाले भाग पर लगा दिया ओर अपना 7 इंच का लंड अंडरवियर से आज़ाद कर दिया. फिर अभी लंड के सूप़ड़े को चुत पर रखा ही था की अर्चना ने आहह करके मुझे जाकड़ लिया. फिर कुछ देर तक अपने लंड को चुत पर रगड़ने से मेरे शरीर मैं भी झंझनी होने लगी थी ओर अर्चना की चुत भी इसे अंदर तक लेने के लिए व्याकुल थी.

मैने लंड को एक धक्के मैं अंदर धकेल दिया, तो अर्चना के मूह से आहह आहह निकालने लगी थी ओर मेरा लंड पूरा का पूरा अर्चना की चुत मैं घुस गया. फिर मैं धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा तो उसने अपने चूतड़ भी उच्छलने शुरू कर दिए थे.

फिर मैने अर्चना के दोनो परो को अपने कंधे पर रख लिया ओर उनके बूब्स के निपल को उंगलियों से मसलना शुरू कर दिया, अर्चना दर्द से हल्के हल्के कराह रही थी. फिर मैं अर्चना के पपीते जैसे बूब्स को ज़ोर से दबोचकर ज़ोर से दबा रहा था ओर मैने अपने धक्के तेज़ कर दिए ओर लगातार अर्चना को छोड़ने लगा. फिर वो मुझसे कसकर लिपट गयी ओर गान्ड को झटके दे देकर छुड़वाने लगी ओर बोले जा रही थी किबाहुत अच्छा लग रहा है, छोड़ते रहो ओर ज़ोर से चुत मरो, मेरी चुत फाड़ दो.

मैने भी अपने धक्के तेज़ कर दिए ओर 10 मिनिट के बाद अर्चना की चुत मैं ही झाड़ गया ओर वो भी निढाल होने लगी ओर फिर मैं अर्चना के उपर से उठकार उनके बगल मैं लेट गया. फिर अर्चना धीरे से बोली तुम बहुत शराराती हो, तो मैने कहा अर्चना दिल तो तुम्हारा भी था. तो उसने कहा क्या करूँ? तुम्हारे मामा मुझ पर ध्यान नही देते, बूढ़े जो हो चले है. आज तुम्हारी चुदाई से मैं संतुष्ट हुई हूँ.

फिर 15 मिनिट के बाद मैं ओर अर्चना फिर एक दूसरे का लंड चुत को सहलाने लगे. अर्चना की चुत गीली थी, तो मैने सॉफ करने को कहा तो वो बोली की पेशाब करके आती हूँ ओर फिर आज रात तुम मुझे जी भर के छोड़ना. मैं भी तैयार हो रहा था ओर जब वो पेशाब करने गयी, तो मैं अपना लंड हाथो से सहलकर छोड़ने को तैयार करने लगा. इस बार मैने अर्चना को हर स्टाइल से छोड़ने की सोच रहा था ओर मैने वैसा ही किया ओर सुबह के 4 बजे तक अर्चना को 3 बार चोदा ओर पूरा नंगा करके हर स्टाइल से जमकर चुदाई की.

चाँदनी रात मे अर्चना पनेरु की चुदाई – Nepali Girl Archana Paneru Ki Chudai

घतना मेरे और मेरे नोकर के बीच kamukta hindi sex kahaniya

घतना मेरे और मेरे नोकर के बीच – kamukta hindi sex kahaniya

मेरा नाम अंजलि शर्मा है ये घतना मेरे और मेरे नोकर रहूल के बीच क है. तो मैं अपने बड़े में आपको बताती हूँ, मेरी एज 38 य्र्स है और मेरे नोकर की एज 18 य्र्स है. मैं एक हाउसवाइफ हू. मेरे हज़्बंद एक कंपनी मे इंजिनियर है. हम देल्ही में रहते है. एक बार मेरे हज़्बंद का ट्रान्स्फर लंडन, उ.क. मैं टू मंत्स के लिए हो गया तो रहूल और में भी उनके साथ लंडन घूमने के लिए उनके साथ चल पड़े. लंडन एक खूबसूरात सिटी है और वही पर कंपनी की तरफ से हमे फ्लॅट मिला था. मेरे हज़्बंद मॉर्निंग मैं जल्दी ही ऑफीस चले गये ईव्निंग मैं जब वो आए त उन्होने बताया की वो 15 डेज़ के लिए दूष्री सिटी के ऑफीस में जायगे और वही रहेंगे तो मेरा और रहूल का मूड बिल्कुल खराब हो गया.

तब उन्होने कहा तुम दोनो यहा घुमओ मैं 15 डेज़ बाद तुम्हे जाय्न करूँगा. अगले दिन वो चले गये मेरा बिल्कुल मूड खराब हो गया था तब रहूल मेरे पास आया और उसने मुझे कहा की मालकिन चलो बाहर घूम कर आते है, फिर हम दोनो लुनदूं घूमने निकल पड़े. हम दोनो ने घूमते हुए काफ़ी एंजाय किया और मेरा मूड भी फ्रेश हो गया था फिर हम दोनो शॉपिंग के लिए गाए रहूल ने अपने लिए कपड़े खड़ीदे लेकिन मेरे लिए वाहा पर कुछ खड़ीदने के लिए मिला नही क्योकि मैं केवल सूट सलवार और शादी ही पहनती थी. तब रहूल ने मुझे जीन्स टी-शर्ट्स ओर शॉर्ट्स दिलवाए मेने काफ़ी माना किया पर वो बोला की मालकिन यहा तो आप ये पहन सकती हो और आप पर ये कपड़े अच्छे लगेंगे तो मैने भी वो ले लिए फिर मैने अपने लिए ब्रा और पेंटी खड़ीदे तब रहूल ने मुझे नेट वाले ब्रा और स्ट्रिप्स वाली पेंटी चूज़ करने को कहा और बोला की ये बहुत सेक्सी लगेंगे मैं उसको ऐसा कराता देख कर हैरान हो गयी तब मैने ट्राइ रूम मे जाके कपड़े पहने और रहूल को दिखाए तो उसने कहा “मालकिन आप बहुत हॉट लग रही हो” तो मैने स्माइल दे कर कहा “चल हट” फिर मैं वोही ड्रेस पहन कर रहूल के साथ अपने फ्लॅट पर आ गयी वाहा आने के बाद हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे.

तब रहूल ने कहा मालकिन क्या आपको आज मज़ा आया घूमने मैं तो मैने हा मे शिर हिलाया तो रहूल ने कहा की मालकिन क्या हम कल शाम को डिस्को मैं चले मेरा मूड वाहा जाने को कर रहा है और वाहा पर सिंगल एंट्री नही है तो हम दोनो चले तो मैने पहले माना कर दिया पर रहूल ने ज़िद करते हुए कहा वाहा हम दोनो डॅन्स करेंगे और काफ़ी मज़ा आयगा तो मैने हा कर दी, तो रहूल ने खुश होकर मुझे हग कर लिया और थॅंक्स मालकिन बालकर मेरे गाल पर किस भी कर दी और वो सोने चला गया उसके गाले लगने और किस करने पर मैं रात को सोते वक्त उसके बड़े मैं ही सोचती रही की कही रहूल मुझे एक मालकिन की बजाए एक हॉट औरात की तरह देख रहा है और हर समय मुझे टच करने के लिए मेरे करीब रहने की क़ोस्सिस कराता रहता है. ये सोचते हुए मैं सो गाइ और अगली सुबह. उठी और रहूल को जगाया और हम दोनो ने फ्रेश हो कर ब्रेकफास्ट किया और मैने रहूल को कहा की में नहाने जा रही हू मेरे नहाने के बाद तुम भी नहा लेना फिर हम घूमने चलेंगे रहूल ने हा में सिर हिलाया और में नहाने आ गयी नहाने के बाद मैने रहूल को आवाज़ दी और मेरी ब्रा और पेंटी देने को कहा जोकि में जान भुज कर लेकर नही आई थी क्योंकि मैं रहूल को देकना चाहती थी की वो मेरे बड़े में क्या सोचता है और में भी उसको लीके करने लगी थी तो उसको सिड्यूस करना चाहती थी

रहूल मेरी ब्रा और पेंटी ले आया और मुझे बाहर से ही देने लगा तो मैने उसको अंदर बुला लिया मैं यूयेसेस टाइम केवल टवल मैं ही थी जिसमे से मेरे 36 इंच के बूब्स आधे दिखाई दे रहे थे और निकचे से मेरी ठिग्स तक मेरी लेग्स दिखाई दे रहे थे, रहूल मुझे देखता ही रह गया मेने उससे ब्रा और पेंटी लिए और उसको बाहर भेज कर कपड़े पहन कर आई. मेने ब्लॅक कलर का टॉप पहना जिसमे से मेरी पूरी कमर दिखाई दे रही थी और मेरे बूब्स की क्लीवेज दिखाई दे रही थी और नीचे मैने स्कर्ट पहनी हुई थी जिससमे से मेरी आधी ठिग्स भी दिख रही थी. मुझे देखकर रहूल का बुरा हाल हो गया था और उसके शॉर्ट में मैने उसके पेनिस को पहली बार खाड़ा होते हुए देखा उसका लंड काफ़ी बड़ा दिख रहा था. फिर वो भी नहाने चला गया उसके नाहकार आने के बाद हम घूमने चले गाए और बाहर ही खाना खाया और शाम तक घूमते रहे हम एक दूसरे का हाथो मैं हाथ लिए जा रहे थे मुझे रहूल का साथ काफ़ी पसंद आ रहा था . फिर हम एक डॅन्स क्लब मैं गये और वाहा जाकर हमने देखे की काफ़ी अँग्रेज़ अपनी फ्रेंड्स के साथ एंजाय कर रहे है कोई डॅन्स कर रहा था कोई ड्रिंक्स ले रहा था मैं और रहूल भी एक दूस्सरे के साथ डॅन्स करने लगे फिर रहूल ने कहा की चलो कोल्ड ड्रिंक पीते है फिर रहूल ने कहा की मालकिन हम बेर पिए तो मैने माना कर दिया पर वो ज़िद कराता रहा त मैने कहा चलो ठीक है पर तदी सी पिएँगे और हम दोनो ने बेर पे ली और हम डॅन्स करने लगे मुझे नशा सा होने लगा और मैं रहूल दोनो काफ़ी क्लोज़ हकेर डॅन्स करने लगे हम दोनो एक दूस्सरे की बहो मे बहे डालकर डॅन्स कर रहे थे तब रहूल ने अपना एक हाथ मेरी कमर पर रखा और मुझे धीरे-धीरे फिचे से सहलाता रहा और एक हाथ मेरे पेट के साइड मे रखते हुए मेरे हिप्स तक ले गया और मेरे बिल्कुल क्लोज़ आगेया था उसे फेस बिल्कुल मेरे साइड मे था और वो अपने गाल मेरे गालो से रग़ाद रहा था.

फिर मैने महसूस किया की उसका लंड खड़ा हो गया है और मेरी थाइस पर रग़ाद रहा है मेरे शरीर मे एक दम से बिजली दौड़ गयी और मैं रहूल के साथ बिल्कुल चिपक गाइ और फिर वो अपने होठ मेरे होतो के पास लाया और हम किस करने लगे कुछ देर किस करने के बाद हम वाहा एक दूस्सरे के साथ चिपक कर डॅन्स करते रहे फिर थोड़ी देर बाद घर पर आ गये में बिल्कुल नशे मे चल रही थी हम 10.30 पर घर आए रहूल मुझे पकड़ कर ला रहा था तो वो मेरे साथ ही मेरे कमरे में आ गया हम दोनो बेड पर एक दूसरे की तरफ आकर लेट गये थे तब रहूल ने मेरी आखों मे देखा और कहा ¡°मालकिन ई लव उ¡± मैने उसको स्माइल दी पर कुछ कहा नही वो मेरे करीब आ गया और मेरे टॉप के उपर से ही मेरे पेट को सहलाने लगा फिर उसने मुझे मुझे होतो पर किस करी हम डोन एक दूसरे को किस करने लगे ये किस काफ़ी लंबा था हम एक दूसरे की जीभ को होतो को चूस रहे थे फिर रहूल और में बेठ गाए वो मुझे किस करते हुए मेरे कपड़े उतरने लगा पहले उसने मेरा टॉप निकल दिया और ब्रा के उपर से ही मेरे बूब्स दबाने लगा.

फिर उसने मेरी स्कर्ट भी निकल दी और वो मुझे बुरी तरह से किस करने लगा उसके बाद उसने अपने कपड़े भी उतरे और मेरे गले लगते हुए मेरे पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे बूब्स चूसने लगा मुझे बहुत मज़ा आ रहा था फिर उसने मेरी पेंटी भी उतार फेकि और मेरी चुत को देखने लगा और फिर साथ के साथ मेर ठिग्स पर किस करते हुए मेरी चुत को चातने लगा मुझे तो बड़ा मज़ा आने लगा मेरी सिसकारियाँ निकालने लगी और में उसका सिर पकड़ कर अंदर की तरफ दबाने लगी मेरा तो बुरा हाल हो गया था में “आआआआ रहूल बेटा बड़ा मज़ा आ रहा हाए हाओउउइ” की आवाज़े निकल रही थी उसके बाद रहूल ने अपना लॅंड मेर मूह के पास लाने लगा और मुहन मे लेने को कहा में माना करने लगी पर रहूल ने ज़बरदस्ती मेरे मूह मे अपना लंड दे दिया और मेरे सिर को पकड़ कर अंदर बाहर करने लगा फिर मुझे लंड चूसने मे मज़ा आने लगा और कुछ देर लंड चूसने के बाद रहूल ने मुझे सीधा लिटा दिया और अपने लंबे लंड को मेरी चुत पर रखकर धक्का मारा मेरी तो जान निकल गयी आआआआ रहूल बेटा आराम से में मार गयी उूुउउफफफ्फ़ रहूल का लंड उसके पापा से भी लंबा और मोटा है मैने ये नही सोचा था मुझे बहुत दर्द हुआ रहूल लंड को मेरी चुत के अंदर बाहर करने लगा मेरी भी चीखे निकल रही थी एयाया….. मार..गयी …आराम से उूुउउइइइमाआ ……आआआअ. में बिल्कुल चिल्ला रही थी पर कुछ देर बाद मुझे मज़ा आने लगा और में अपनी गान्ड उठा उठा कर रहूल का साथ देने लगी ऑरा कुछ देर बाद हम दोनो ने एक साथ पानी चोद दिया और हम ऐसे ही लेते रहे और उस रात रहूल ने मुझे कई बार छोड़ा.अगले सुबे जब मेरी निदे कुली तब मैं अपने नोकर के बहो मे थी और पूरी नगी थी. मेरे सारे कपड़े एआधार उधर पड़े थे. मैने उन्हे समेटा और बाथरूम की और चली गयी. मैं तो यही सोच रही थी की जो मैने जो अपने नोकर के साथ किया वो सही था या ग़लत. हलकी मैं नशे मे थी लेकिन मैं क्या कर रही हू ये मुझे होश तो था. मेरा बेटा तो अभी क्या सही क्या ग़लत नही जनता लेकिन अगर मैं चाहती तो इशे रोके सकती थी. पर मैं सेक्स की चाहत मे इतनी बह गयी की एक बार नही काई बार रात मे मैने अपने नोकर से चुद़वाई. लेकिन उस बात का मुझे बहुत ही अप्सोस हो रहा था.मैने सोच लिया था की बस जो हुवा सो हुवा लेकिन अब मैं आगे नही बडूँगी. और नहा के किचन की और बाद गयी. और नाशता बनाने लगी तभी मेरे कमर से होते हुवे दो हट मेरे स्ठानो पे आ गये मैं ने देखा तो मेरा बेटा नगा ही किचन मे आ के मुज़से पीछे से लिपटा है और उसका ठाना लॅंड मेरे साररी के उपर से ही पिछवाड़े गुडो के दरअरमे रग़ाद खा रहा है. मेरे स्ठानो की मसल्न और गांड मे होने वाली रग़ाद से मेरा सायं टूटा सा जा रहा था. मैं तो अपने आप को ही रोक नही पा रही थी. तो बाला नोकर को कैसे रोक पाती.मई ने जैसे तैसे उसे नहाने बेज दिया. फिर नशा ता दिया. आज मेरे नोकर के चारे पे एक अनोकी कुशी ज़लाक रही थी. वो टीवी देख रहा था. मैं ने सोच लिया की मैं अपने नोकर से कल के बड़े मे बात करूँगी.और मैं अपने नोकर के पास आ गयी और उसे कहा रहूल मैं तुमसे बात करना चाहती हू.

रहूल : हा मालकिन कहो ना.
मई : बेटा कल रात को जो अपने बीच हुवा वो अब फिर नही होना चाहिए.
रहूल : (चॉक ते हुवे) लेकिन कू मालकिन मुझे कुछ ग़लती हुवी क्या.
मई : नही बेटा ऐसी बात नही है.
रहूल : तो मालकिन तो आपको कल रात मेरे साथ मज़ा नही आया. अगर ये बात है तो मुझे एक और मौका दीजिए एस बार मैं आपको कुश कर दूँगा.
मई : बेटा ये बात नही है तूने तो मुझे तेरे पापा से भी जादा कुश कर दिया.
रहूल : फिर के बात है मालकिन.
मई : बेटा मैं तेरी मा हू और मा नोकर मे ऐसे समबाड़ पाप होते है.और हमारे बीच जो हुवा वो किसी को पता चला तो अनरात हो जाएगा.
रहूल : मालकिन ये आप क्या कह रही है. मुझे कुछ समाज नही आ रहा है. अगर मा बेटा सेक्स करना पाप है तो कल रात हम ये पाप कर चुके है. और अपने बीच मे जो हुवा वो हम दोनो के साइवा किसी को पता नही चलेगा.
मई : मुझे ये पता नही लेकिन अब हमारे बीच मे सेक्स नही होगा.
रहूल : मालकिन ये आप क्या कह रही है. अगर आपको मेरे साथ सेक्स करना ही नही था तो आपने मुझे अपने जल मे फसा ही कू आपने मुझे अपने बदन को दिखाया ही कू. एस सब की शूरावट तो आपने ही की थी.और आप ही म्यूज़्ज़ इस तरह दूर कर रही है. ठीक है अगर आप यही चाहती है तो यही होगा. कह
मेरा बेटा गुसे से अपने रूम मे चला गया और दरवाजा लॉक कर लिया. मैं तो अभी भी टीवी के सामने सोफे पे बैठी थी. हा शायद मेरा बेटा रहूल सही कह रहा था.अगर मैं ने उसे उस दिन नहाते हुवे सुदूस नही किया होता. उसके साथ चिपक के डॅन्स नही किया होता तो वो आगे बदाता ही नही था. लेकिन मैने अब जो किया था उसे पीछे हटाना नोकर के लिए बहुत मुषा किल था. अगर वो चाहता तो मुझे ब्लॅकमेल कर के भी चोद सकता था लेकिन उसने ऐसा नही किया. लेकिन मैं तो उसके साथ जाती कर रही थी. मैं अपना फ़यसला अब बदल ना चाहा थी. की अब मैं अपने नोकर को और दुखी नही करना चाहती थी. अगर ये पाप ही सही मैं इस पाप को अपने माथे पे लेने के लिए तैयार थी.और मैं ने सोच लिया की अपने कुशी के लिए नही तो अपने नोकर के कुशी के लिए उससे सेक्स करूँगी.रात मे उसके साथ सेक्स मे जो मज़ा था इसको तो मैं शबाड़ो मे बया नही कर सकती थी. शायद मेरे मन बस इस बात की तकरार थी की वो मेरा बेटा था.यही कारण था की मैं ने ऐसा फ़यसला किया था. लेकिन ऐसा फ़यसला करते वख मैने ये नही सोचा था की मेरे नोकर पर मेरे इस फ़यसले का असर क्या होगा.लेकिन अब और दुख मेरे नोकर को नही देना चाहती थी. मैं ने सोच लिया की अब मैं उसके साथ सेक्स करूँगी और कुध भी मज़े लूँगी.मई तो अपने नोकर से बात करने से दर रही थी. मैं ने एक बार बात करने की कोशिश भी की लेकिन वो मुज़से बात ही नही कर रहा था.अब दोफर हो गयी थी मैं खाना लेके उसके कमरे का दरवाजा खत खाटाया नोकर ने दरवाजा खोला उसके आखे भारी थी. वो मुज़से माफी मॅग रहा था. मैं समाज नही पा रही थी वो ऐसा क्यू कर रहा था.
रहूल : मालकिन मैं ने गुसे मे जो कहा मुझे माफ़ कर दो.मई जनता हू की ग़लती मेरी भी है मुझे रुकना चाहिए था.
मई : बेटा माफी तो मुझे तूज़ से मागनी कहिए ये सब मेरे कारण ही हुवा.
रहूल : जो हो गया सो हो गया हमारे बीच जो हुवा ये मैं किसी को नही बताउँगा और आज के बाद इसको बुल ज़ाऊगा.
मई : उसकी कोई ज़रूरात नही कुकी मैं ने सोच लिया है की अब मैं तेरे साथ सेक्स करूँगी फिर इसका एँजम कुछ भी हो.
रहूल : मालकिन तुम सच कह रही हो.
मई : हा. बस एस का किसे पता नही चलना कहिए.जो होगा बंद कमरएमए और बंद कमरएमए तो मैं तेरी हू फिर तुम मुझे अपनी रंडी समझो या तेरी बीवी लेकिन बाहर वालो के लिए तेरी मा.
रहूल : हा मालकिन इस बात की किसी को कबार नही होगी. लेकिन अब मेरा लॅंड भी टाइट हो गया है.

मई भी देख सकती थी की मेरे नोकर का लॅंड छड़ी मे तंबू बनके खड़ा था.मई ने उसके खड़े लॅंड को बाहर निकाला उसके खड़े लॅंड को देख कर मेरे मन मे उसे मुमे लेकर चूस ने की एआछा होने लगी.

तो मैने उसे अपने मुमे भर ने लगा उसका लाल सूपड़ा मुझे ललचाने लगा मैं ने उसे सूप़ड़े पे जीभ फेर ली रहूल के लॅंड ने तो एक ज़तका मार दिया उसके बदन मे भी एक रोमच सा दौड़ पड़ा अब मैने थोड़ी देर सूप़ड़े को चाट ने के बाद उसके लॅंड को अपने मुमे भर लिया उसका मोटा और तगड़ा लॅंड मुमे पूरी तरसे नही ले पा रही थी.उसका पूरा लॅंड मेरे गले तक फस रहा था. मैने तो अब रहूल के लॅंड को अपने मुमे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.मेरे नोकर का लॅंड मुमे लेने मे मुझे परेशानी तो हो रही थी पर लेकिन उसके लॅंड को लोलीपोप की तरह चूसने मे मुझे मज़ा भी आ रहा था.मेरा नोकर मेरी चूसा से पागल हो रहा था. उसके दोनो हट मेरे बालो मे फेज़ थे.वो तो अब पागल हुवा जा रहा था. वो तो खुद मेरे मु को अपने लॅंड पर दबा रहा था.जिससे उसका लॅंड मेरे गले तक अटक रहा था. उसका लॅंड जब मेरे गले तक जाता तो मेरे ससे अटक सी जाती.कुछ ही पॅलो मे उसकी ये हरकत तेज़ हो गयी शायद वो निकालने के नझडीक आ गया था. उसने तो अब मेरे सर को बालो को पकड़ कर अपने लॅंड पर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. उसका लॅंड तो मेरे गले मे भी पूरी अंदर गुस रहा था. जिससे मेरी हालत करब हो रही थी. कुछ ही देर मे उसके लॅंड से माल निकालने लगा और मेरा मु उसके रसीले रस से भर गया. और मैं ने उसका लॅंड बाहर नाकला और उसे माल मैं गतक गयी.उसका स्वाद नमकीन था और किस अमृत की तरह नोकर का ये अमृूट पे मैं धनी हो गयी.मैने तो नोकर के लॅंड पे बचा कूचा अमृत भी चाट गयी. फिर उसके लॅंड को मैने चड्डी के अंदर डाल दिया. मेरी सारी ठीक की फिर हम गुम्ने बाहर चले गये.

घतना मेरे और मेरे नोकर के बीच kamukta hindi sex kahaniya

चुदाई का मौसम 9

चुदाई का मौसम – Indian Sex Story – 9
चूड़ियों के खदकने की आवाज़ों के साथ मिली जुली किसी औरात की सिसकारियों ने बॉब्बी को नींद से झंझोड़ दिया ………..
मान ही मन गालियाँ देता हुआ बॉब्बी उठा तो पाया बूत मधाम पीले नाइट बल्ब की रोशनी से नाहया था . और नीचे दो बर्त खाली हो गयीं थी . उसके नीचे की और सामने वाली बर्त पर कोई साया हिलता नज़र आ रहा था कंबल के अंदर . बॉब्बी असमंजस मैं प़ड़ गया , जाने को तो ज़ाकिर कह रहा था , वो चाचा कहाँ है , और आवाज़ तो औरात की आई थी इसका मतलब रज़िया अकेली थी , बॉब्बी ने झुक कर देखने की कोशिश करी , सिर्फ़ कंबल को ही हिलता पाया , पर कंबल कुछ ज़्यादा ही उभरा हुआ लगा उससे , वो सोचने लगा ‘ रज़िया इतनी मोटी तो नही थी ‘

अचानक कंबल सिकुड कर एक तरफ हो गया , और जो नज़ारा नुमाया हुआ उसने बॉब्बी के होश उसा दिए …….

रज़िया पीठ के बाल लेती हुई थी और उसकी आँखें बंद तीन , अपने निचले होंठों को बुरी तरह से चबा रही ….आहह उहुंम्म्म………….उसका बुर्क़ा गले तक खुला हुआ था ……… पीली रोशनी मैं एक तंग काली ब्रा मैं क़ैद उसके दूधिया मुममे पानी से भरे हुए गुब्बरूण की तरह लग थे जिन्हे दो हथेलियूं ने कस्स के जाकड़ रखा था ……. मुममे इतने बड़े थे रज़िया के की उन्हथेलियों में समा नही रहे थे ……..उसके नीचे रज़िया का नंगा पेट दिख रहा था जो रज़िया की हर सिसकी के साथ थरथरा रहा था ….

” आअहह चाचााअ……म्‍म्म्मह”

ये सुनके बॉब्बी चौंका , उसने ध्यान से नीचे की और देखा तो पाया की रज़िया की सलवार खुली हुई थी और घुतनूं तक उतरी हुई थी , साथ म्नई उसकी काली कक़ची भी सती हुई थी ……और उसकी दोनो टाँगों के बीच एक गंजा सिर जिस पर हल्के हल्के सफेद बाल थे , बड़ी मशक्कत के साथ हिल डुल रहा था , गौर से देखने पर बॉब्बी को यकीन हो गया की यह चाचा जान ही था जिसके लिए रज़िया अभी सिसकी थी ……..इसका मतलब ज़ाकिर के जाते ही ….??…..हे राम ….. बाप समान चाचा अपने ही भतीजे की बहू , यानी अपनी बेटी समान औरात की ऐसे ………ऐसा सोच कर बॉब्बी को घृणा सी हो गयी , पर रज़िया का तराशा हुआ बदन , उसकी सिसकियाँ और अभी अभी देखा हुआ ख्वाब , तीनों ने मिलकर बॉब्बी के दिमाग़ मैं वहशत का राज कर दिया था , और उसके अंदर जागे वहशी ने कहा ‘ बेटा माज़ी लूट माज़ी , काए को इतना सोचता है . ‘ ……

बॉब्बी ने घड़ी मैं टाइम देखा तो देल्ही आने में अभी आधा घंटा ही बाकी था . उसने आगे का नज़ारा देखना जारी किया …..

चाचा रज़िया की टाँगें बड़ी बेहूदा तरीके से फैलाए , उसकी चुत मैं अपना मूउः घुसाए अपनी जीभ से उसकी चुत के होंठों को बुरी तरह चाट रहा था , और अपने बूढ़े सूखे हुए हाथों से उसकी महकमल जैसी गुदाज़ चुचियूं को मसल रहा था , रज़िया नशे के आलम में ज़ोरों से सिसकियाँ ले रही थी , अपने चुततादों को उछाल उछाल कर अपनी चुत चाचा को पेश कर रही थी , …..
और हमारे बॉब्बी साहब ने आज अपने दिमाग़ को उतीज़ाक स्थिति मैं भी नियंत्रित रखते हुए सही से इस्तेमाल किया , वो अपने मोबाइल फोन मैं सारा नज़ारा क़ैद कर रहे थे , कॅमरा नाइट विषन मोड मैं था इसीलिए तस्वीर बहुत ही उम्दा और हसीन आ रही थी …..करीब 10 मिनिट तक रज़िया की चुत ऐसे ही चातने के बाद , अचानक रज़िया का सारा शरीर अककड़ गया और उसने गहरी लंबी साँसें लेते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ को दबाया , उसका ज्वार चढ़ने के बाद अब धीरे धीरे उतार रहा था , और उसका शरीर ढीला पड़ने लगा , चाचा इस बीच बिल्कुल नही रुके पर अब लगातार चूसा के बाद वो बुरी तरह तक गये थे , आख़िर बुढ़ापे का तक़ाज़ा था , चाचा उठ गये , उन्होने अपना मुहह उठाया तो बॉब्बी ने कॅमरा मैं देखा की उनका चेहरा पूरा रज़िया की चुत के रस से भीगा हुआ था .
चाचा : ” चल जल्दी कर हरंखोर रंडी , एक तो तेरा ख़सम जो बहनचोड़ जाईपूरे की जगह कोटा उतरा , सालाअ सारा टाइम खोती कर दिया मादरचोड़ड़ ने …..और अब तुझे गरम भी करूँ कुतीयाअ , वैसे तो लॉड को तरसती है और वैसे साली को चटाई चाहिए चुत की …….चल अपनी टाँगें फैला , मेरा लॅंड अब और नही रुक सकता .”

रज़िया : ” अब सूखे मैं डालोगे तो दर्द होगा ना चाचा.. ” …ज़िया ने अपनी गोरी मखमली जांघें फैला दिन , एक टाँग को उठा कर बर्त की उपरी तरफ रख दिया …. उसकी फूली हुई गुलाबी चुत खिच कर एक दम फैल गयी ……बॉब्बी भी रेकॉर्डिंग से ध्यान हटा कर आँखें फाड़ फाड़ के देखने लगा ….
चाचा ने अपना पाजमा खोल के अपने लॉड को बाहर निकाला…..तोड़ा लंबा और नुकीला था , पर ठाना हुआ था …..रज़िया की दोनो टाँगों को कस्स के पकड़कर चाचा ने आव देखा ना ताव और अपना लॅंड चुत पर टीका कर ज़ोर का झटका लगा दिया …….रज़िया ने अपनी मुट्ही भीच कर अपने मूउः मैं दबा दी …….उसके दाँत उसमे गड़ गये और खून निकालने लगा ….चाचा ने एक ही झटके मैं अपना पूरा लॅंड रज़िया के अंदर घुसा दिया था …… थोड़ा रुक कर चाचा हाने लगा ….फिर धीरे धीरे अपना लॅंड उसने बाहर खींचा ……..और रुक कर दोबारा एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया …..रज़िया पीठ के बाल उपर की तरफ उछाल पड़ी ……‚ म्‍म्म्माओहाा‚ ………….चाचा ने फिर तबाद तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए …..अब उन दोनो को आवाज़ निकालने का कोई दर ना था ….हुचक हुचक की आवाज़ से चुदाई का खेल शुरू हो गया था …..चाचा का पतला पर लंबा लॅंड रज़िया की चुत मैं जगह जगह घुस कर हलचल मचा रहा था …..रज़िया की चुत इतनी गरम थी की चाचा का लॅंड बुरी तरह से पनियना शुरू हो गया था , थके होने के बावज़ूद चाचा अपनी हवस से मजबूर धक्के पे धक्के लगाए जा रहे थे , और रज़िया उचक उछाल कर हर धक्के के दम को दर्शा रही थी …….बूढ़ी हवस और प्यासी जवानी का यह खेल करीब 25 मिनिट तक चका और एक तेज़ धक्के के साथ चाचा रज़िया से सात कर लेट गये , उन्होने एक दबी हुई गुर्राहट के साथ अपना सारा माल रज़िया की चुत के सुपूरे्द कर दिया , रज़िया भी दोबारा झड़ने के कगार पर थी , और उसने चाचा के ढीले पड़ते लॉड पर दो चार धक्के अपनी गान्ड को उठा उठा कर लगाए , और एक झटका मार के वो भी झाड़ गयी ……..
दोनो के मिले जुले रस आपस मैं मिलकर रज़िया की जांघों के उपर बहने लगे , चाचा उपर की तरफ खिसककर रज़िया के उपर आ गये , और बड़े प्यार से उसका चेहरा सहलाने लगे , और बड़ी शिद्दत से उसके होंठों को चूज़ लगे …..रज़िया ने अब आँखें खोल ली थी और चाचा का साथ देने लगी ……अचनाक उसकी नज़र चाचा के चेहरे से हथकार उपर की तरफ जा पड़ी …………………………

“आआययईीीईईईई”

रज़िया ने अपना मुहह चाचा के मूउः से हटाया और ज़ोर से चीख पड़ी………..उसने बॉब्बी को उपर बैठे हुए उनकी तरफ कॅमरा तां कर रेकॉर्डिंग करते हुए देख लिया था ……. उसकी चीख सुनकर चाचा उसके उपर से हाते और पीछे मुड़कर उपर देखने लगे , बॉब्बी को देखकर उन्हे साँप सूंघ गया …………..वो हड़बड़ा कर रज़िया के उपर से उठे और अपना पाजमा उपर करके नडा बाँधने लगे ………….रज़िया भी अपने अंगों को हाथों से छुपाने की कोशिश करने लगी ………बॉब्बी ने रेकॉर्डिंग बंद करके फोन जेब मैं डाल लिया था …और वो भी धीरे से बर्त से उतारकर नीचे आ गया …..

चाचा: ” आई लड़के यह क्या बेहूड़गी है …..”

बॉब्बी ( व्यानगपूरवक हंसते हुए ) : ” बेहूड़गी और मैं ?? ….फिर तुम दोनो क्या कर रहे थे ??. ”

फोन मैं रेकॉर्डिंग होने से बॉब्बी काफ़ी निडर हो गया था .

उसकी ब्बत सुनकर चाचा और रज़िया दोनो सन्न रह गये …दोनो के मूउः से कुछ फूटते नही बना .
फिर चाचा ने थोड़ी हिम्मत करके कहा
” तुमने हमारी वीडियो बना ली , यह ग़लत है , बिना इज़्ज़ज़त के किसी की फोटो या वीडियो बनाना जुर्म है . ”

बॉब्बी : ” हाहाहा , और जो तुम कर रहे थे अगर तुम्हारे प्यारे ज़ाकिर ने देख लिया तो क्या होगा ….चाचा जानी हाहाहा. ”

इस पर रज़िया जो चुप थी बोल पड़ी .
” तुम्हे हमारा आता पता मालूम होगा तो बताओगे ना ज़ाकिर को .”

बॉब्बी :” उसमे क्या है तुम्हारी ट्रेन की रिज़र्वेशन और टिकेट नंबर से तुम्हारी रेलवे बुकिंग निकल लूँगा फिर तो पता चल ही जाएगा …हहा..और जब इस वीडियो को नेट पर डालूँगा तो ज़ाकिर मियाँ अपने आप अपनी हेरोयिन बीवी और विलेन चाचा को देख लेगा ….हाहाहा. ”

रज़िया यह सुनकर दर के मारे चुप हो गयी …..चाचा को भी कुछ समझ ना आया …

चाचा : ” देखो बरखुरदार , इस तरह हमे ज़लील ना करो , यह रेकॉर्डिंग हमे दे दो और बदले मैं कुछ चाहो तो माँग लो , पर एक बुज़ुर्ग पर ऐसा सितम ना दाहाओ .”

बॉब्बी ने कुछ नही कहा बस एकटक रज़िया के रसीले होंतों को देखने लगा ……चाचा ने भी ताड़ लिया की बच्चे की नज़र कहा है और बॉब्बी की पेंट मैं बना तंबू उससे छुपा नही था …..अब देल्ही आने मैं ज़्यादा टाइम नही था जल्द ही कुछ करना पड़ेगा …….
चाचा : ” बेटा ज़रा पाँच मिनिट दो हम अभी आते हैं .”

ऐसा कहकर वो इशारे से रज़िया को अपने साथ बूत से बाहर टाय्लेट की तरफ ले गया .

टाय्लेट जाकर चाचा ने रज़िया से बड़ी मिननुटें की उससे समझाया की वीडियो ज़ाकिर को मिल गया तो क्या होगा , फिर आपस मैं कुछ सलाह करके वो लोग बूत की तरफ चल पड़े ……

चाचा और रज़िया कमरे मैं आए ओए जैसा उनके बीच टाई हुआ था ,रज़िया किसी भूखी शेरनी की तरह बॉब्बी पर टूट पड़ी , उसने बॉब्बी के होठों को मूह मैं लेकर चूसना शुरू कर दिया . बॉब्बी इस अचानक हुए हमले से हड़बाधा पड़ा , यह उसकी लाइफ का पहला होठों पर किस था , और वो भी रज़िया के रसीले मुलायम मोटे भरे हुए होंठों का , बॉब्बी की खुशी का ठिकाना ना रहा , रज़िया के होठ इतने चिकने थे की बॉब्बी के होंठ उन पर बार बार फिसले जा रहे थे , उसने अपने दोनो हाथों को रज़िया की कमर मैं डाल दिया , उसके एक हाथ में उसका फोन था ,
चाचा ने बड़ी होशियारी से बॉब्बी के हाथ से उसका फोन ले लिया , बॉब्बी ने रज़िए से अलग होना चाहा पर रज़िया ने उससे कस के गिरफ़्त मैं ले रखा था ………………
रज़िया के साथ वाला एपिसोड बाद मैं कंटिन्यू होगा ….अब फ्लॅशबॅक ख़त्म और कहानी वापस वर्तमान मैं …….

चुदाई का मौसम – Indian Sex Story – 9

कज़िन के मूह मे लंड डाला

हेलो दोस्तो, मेरा नाम सूर्य है ओर मैं उत्तर प्रदेश के फेजबाद से हूँ, मैं इस साइट का बहुत बड़ा फन हूँ. मैं इस पर प्रकाशित होने वाली हर कहानी को पढ़ता हूँ. बहुत सी कहानियाँ पढ़के के बाद मुझे भी लगा की मुझे भी अपनी कहानी लिखनी चाहिए. मैं एक 22 साल का लड़का हूँ ओर मेरे लंड का साइज़ 7 इंच है. मैं एक अछी बॉडी वाला लड़का हूँ, मेरी हाइट 6 फुट है.

मेरी कज़िन का नाम ममता है ओर वो मेरी बुआ की लड़की है. उसका साइज़ 36 बूब्स, 24 कमर ओर 35 की गान्ड है, वो हमारे यहाँ रहकर पढ़ाई कराती थी, वो मुझसे कोई 3 या 4 साल बड़ी है, उसके दो भाई है. अब मैं आपको बोर ना करते हुए सीधे कहानी पर आता हूँ, बात आज से करीब 7 या 8 साल पहले की है जब मैं 12वी क्लास मैं पढ़ता था. मुझे दोस्तो से थोड़ी बहुत सेक्स की जानकारी थी, मैं अक्सर ही उसके साथ चिपक कर सोता था, क्योंकि मैं बहुत छ्होटा था इसलिए वो भी बुरा मनती थी.

एक दिन मैं अचानक से रात मैं उठा तो मेरा हाथ उसके बूब्स पर था, मैने महसूस किया की वो रात मैं ब्रा नही पहनती थी सिर्फ़ नाइटी पहनकर सोती थी. मुझे उनके बूब्स बड़े मुलायम लगे, तो मैने उनको धीरे धीरे सहलाना शुरू किया ओर इधर मेरे लंड महाराज भी अपनी नींद से उठ रहे थे. अब लंड धीरे धीरे उठकर पूरी तरह से खड़ा हो गया. उधर मैं उसके बूब्स सहला रहा था, क्या बताउन यार कितना मज़ा आ रा था? मैं तो जन्नत मैं था. मैने पहली बार किसी लड़की के बूब्स च्छुए थे.

फिर धीरे धीरे मैं ओर आगे बढ़ा ओर मैने अपना हाथ उसकी क्लीवेज पर रखा, जिसमे से उसके आधे बूब्स बाहर नज़र आ रहे थे. अब मैं अपने दोनो हाथो से उसके दोनो बूब्स सहलाने लगा. मेरा दिल ओर आगे बढ़ने को कह रहा था, लेकिन दिमाग़ रोक रहा था की कही वो उठ ना जाए ओर मुझे पकड़ ना ले, लेकिन कहते है ना चुत की भूख की आग लगती है तो बहोत से भी दर नही लगता है, तो मैने अपना हाथ उसकी नाइटी मैं डाल दिया ओर उसके बूब्स सहलाने ओर हल्के हल्के दबाने लगा, क्या मस्त बूब्स थे यार उसके? बड़े मुलायम ओर शायद मेरे सहलाने की वजह से निपल बड़े सख़्त हो गये थे.

फिर धीरे धीरे मैने अपना पूरा हाथ उसके शरीर पर घुमाया. क्या बताउन यार उसकी बॉडी की स्किन कितनी सॉफ्ट थी? फिर मैं हाथ फेराते हुए उसकी नाभी पर पहुचा ओर वाहा हाथ फेरने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद मैं अपना हाथ उसकी पेंटी पर ले गया, उसकी पेंटी को टच करते ही मेरे शरीर मैं अजीब सी झंझनाहट हुई जैसे मेरे पूरे शरीर मैं बिजली दौड़ गयी हो. फिर मैने यहा वाहा टटोलना जारी रखा तो मुझे एक फूला हुआ पार्ट दिखा. मैं तुरंत समझ गया की ये उसकी चुत है.

फिर मैने उसकी पेंटी के नीचे से उंगली डालकर मैने उसका जयजा लिया, क्या बताउन यार उसकी चुत पूरी आग की भट्टी लग रहिति? एक ऐसी आग जिसमे हर कोई जल जाना चाहता है. फिर ऐसा करते हुए वो रात निकल गयी ओर उसे पता नही चला. फिर जब भी मैं उसके साथ सोता तो मैं यही सब कराता था, लेकिन फिर जब तक वो हमारे यहाँ रही मैं इसके आगे नही बढ़ पाया.

फिर उसका कालेज पूरा हो गया ओर वो अपने गाँव चली गयी. फिर मैं अकेला प़ड़ गया ओर उसको सोचकर मुट्त् मरने लगा, लेकिन वो मज़ा नही आता था. मेरे पापा चार भाई है ओर उनमे मेरे पापा सबसे बड़े है, मेरे बड़े अंकल की एक बेटी है, उसका नाम सोमया है, वो मुझसे दो साल छ्होटी है. जब मेरी बुआ की लड़की चली गयी तब मैने सोचा क्यो ना इसी से काम चलाया जाए? फिर मैं उसके साथ भी वही सब करने लगा, लेकिन मैं उसके साथ ज़्यादा खुल नही पाया था.

फिर मेरे बड़ी बहन की शादी आ गयी, उसमे मेरी बुआ की लड़की भी आई हुई थी. अब वो हमारे घर पर करीब दो साल के बाद आई थी, उन दो सालो मैं वो काफ़ी ज़्यादा बदल गयी थी ओर उसके बूब्स ओर बड़े हो गये थे. लेकिन अब मैं 21 साल का हो गया था, तो मुझे उसके साथ सोने को नही मिलता था, लेकिन जब से वो आई है, उसके व्यवहार मैं काफ़ी बदलाव हुआ है. अब वो खुलकर मज़ाक कराती ओर कभी कभी तो हद ही पर कर देती थी. एक दिन बाथरूम मैं आहा रही थी, हमारा बाथरूम हमारे घर के बीचो बीच आँगन मैं है ओर उपर से खुला है.

मैने डिसाइड किया की आज इसे नंगा देखूँगा, मेरे घर की चाट से बाथरूम के अंदर का पूरा दिखता है तो मैं चाट पर चढ़ गया ओर च्छुपकर उसे नहाते हुए देखने लगा, लेकिन वो ठीक से नही दिख रहा थी. वो बाथरूम मैं बैठकर नहा रही थी, उसके साथ मेरी बहन भी खड़ी थी तो मैं निराश हो गया, लेकिन फिर भी मैं देखता रहा ओर जब वो कपड़े पहनने के लिए उठी तो वो थोड़ा बाहर आ गयी, क्योंकि मेरी बहन वहाँ बैठकर नहाने लगी थी.

फिर वो जैसे ही बाहर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया, उसके बूब्स क्या लग रहे थे? ओर उसका फिगर तो कमाल का था, उसे देखकर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया ओर फिर मैं उसे देखते हुए वही पर उसके नाम की मुट्त् मरने लगा. तभी उसने मुझे देख लिया, मेरी तो फट गयी थी, अब क्या होगा? लेकिन फिर मैने देखा की वो चुपने या गुस्सा होने की बजाए वो तो मुझको एक सेक्सी सी स्माइल दे रही थी. फिर मैं वहाँ से चला गया ओर दिन भर उससे बचता रहा. फिर रात को जब मैं घर वापस आया तो काफ़ी देर हो चुकी थी ओर घर की सारी औराते पड़ोस के प्रोग्राम मैं गयी हुई थी. फिर मैं खाना खाकर एक कमरे मैं सो गया, फिर थोड़ी देर ऐसे ही लेते रहने के बाद मुझे नींद नही आ रही थी ओर सुबह का वही सीन मुझे याद आ रहा था. तभी थोड़ी देर के बाद वो फोन पर किसी से बात करते हुए मेरे कमरे मैं आई ओर मुझे सोता हुआ देखकर फोन पर बात करते हुए मेरे बगल मैं सो गयी.

उसके बाद मैं मुझे पता चला की वो उसका होने वाला पाती था, फिर थोड़ी देर के बाद उसने फोन रख दिया. फिर वो लेते हुए ही मेरे पास आ गयी ओर मुझे जगाने लगी. फिर मैं थोड़ी देर के बाद बहाना करते हुए उठा तो उसने कहा की तुम सुबह क्या कर रहे थे? तो मैने बड़ी हिम्मत करके कहा आपको देख रहा था, तो मैने सोचा यही मौका है आज जो भी करना है कर लो. तो उसने कहा अच्छा बहन को नंगा देखते हुए शर्म नही आई, तो मैने कहा खूबसूराती से शरमाना कैसा? फिर मैने पुचछा आप गुस्सा तो नही हुई, फिर मुस्कुरा क्यो रही थी? तब उन्होने मुझे बताया की तुम मेरे साथ पहले जो करते थे मुझे सब पता है. फिर मैं समझ गया इसका भी मन है, फिर उसने काओड़े बदलने के लिए लाइट जलाई. फिर उसने मेरे ही सामने मेरी छ्होटी कज़िन के स्कर्ट ओर टॉप पहन लिया ओर आकर मेरे पास सो गयी. फिर मैने देर किए बिना ही उसके बूब्स दबाना ओर किस्सिंग शुरू कर दिया. तभी उसके मंगेतर का फिर से फोन आ गया, लेकिन मैं रुका नही ओर मैं उसे चूमता रहा ओर उसके बूब्स दबाता रहा.

फिर थोड़ी देर के बाद मैने उसके पूरे कपड़े उतार दिए ओर ब्रा खोल दी. फिर मैं उसके निपल चूसने लगा वो, आआययय्या आहह करने लगी थी. उसके पाती ने पुचछा क्या कर रही हो? तो उसने कहा आपसे बात करके उत्तेजित हो गयी तो अपने बूब्स दबा रही हूँ. इधर मैं उसकी पेंटी उतार चक्का था ओर उसकी चुत मैं उंगली कर रहा था ओर वो मेरा लंड सहला रही थी. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. ऐसी ही काफ़ी देर तक करने के बाद वो झाड़ गयी ओर फिर मैं उसे उसके मूह को छोड़ने लगा. वो बहुत अच्छा लंड चुस्ती है. फिर थोड़ी देर तक छोड़ने के बाद मैं उसके बूब्स छोड़ने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद मैं भी झाड़ गया, उसके बाद वो जब तक हमारे घर पर रही हम मौका मिलते ही शुरू हो जाते थे, लेकिन अब वो चली गयी है. अब तो बस उसके नाम की मुट्त् मारकर काम चलता हूँ.